एक तरफ दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई जेपीसी वक्फ बोर्ड एक्ट में संशोधन की मशक्कत कर रही है। दूसरी तरफ प्रदेश में भाजपा से जुड़े एक कैबिनेट मंत्री (दर्जा प्राप्त) नेता ने अपनी ही पार्टी के बोर्ड पर लापरवाही के आरोप लगा दिए हैं। इस भाजपा नेता का कहना है कि मप्र वक्फ बोर्ड से सिर्फ सियासत हो रही है, यहां से मिलने वाले फायदे लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
मप्र राज्य हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी इस समय कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त हैं। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और इससे पहले पार्टी के कई जिम्मेदार पदों पर वे रह चुके हैं। वारसी ने मप्र वक्फ बोर्ड की कारगुजारी और यहां से संचालित व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल से ज्यादा वक्फ संपत्ति हमारे पास मौजूद हैं, इसके बावजूद इनका कोई फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है। रफत ने वक्फ बोर्ड पदाधिकारियों पर आरोप लगाया है कि यह बोर्ड माफियाओं का अड्डा बन गया है। यहां पदस्थ लोग महज सियासत में जुटे हुए हैं। जबकि इस संस्था से होने वाले मुस्लिमों के काम नहीं हो पा रहे हैं।
भाजपा का बोर्ड
वर्तमान में मप्र वक्फ बोर्ड पर भाजपा का कब्जा है। डॉ सनव्वर पटेल की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड में अधिकांश मेंबर भाजपा से ताल्लुक रखते हैं। करीब दो वर्ष पहले बने इस बोर्ड का फिलहाल करीब तीन साल कार्यकाल और बाकी है।
डॉ सनव्वर और रफत में समानताएं
मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल भाजपा से जुड़े हैं। जबकि हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी भी भाजपाई खेमे से हैं। वर्तमान में इन दोनों को राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री का दर्जा और सुविधाएं प्राप्त हैं। डॉ सनव्वर पटेल पूर्व में प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। रफत वारसी भी इस पद पर आसीन रहे हैं। जहां डॉ सनव्वर पटेल उज्जैन के निवासी हैं, वहीं रफत वारसी श्योपुर के बाशिंदे हैं। लेकिन इन दोनों के राजनीतिक आका ग्वालियर क्षेत्र से संबंध रखने वाले भाजपा के दो अलग कद्दावर नेता हैं।
इधर कांग्रेस का पलटवार
हज कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी द्वारा वक्फ प्रॉपर्टी की तुलना पाकिस्तान से करने पर कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस मीडिया विभाग के मुकेश नायक ने इस तुलना पर बीजेपी को घेरा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को ऐसे ही मुस्लिम नेताओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बात सुधार की है तो किया जाना चाहिए, लेकिन इस तरह किसी बात की तुलना पाकिस्तान से करना उचित नहीं है।