संजय टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण के मामले में मध्य प्रदेश वन विभाग ने पर्यटन विकास निगम के खिलाफ वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया है। टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर में बिना अनुमति किए गए निर्माण को ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस मामले में पर्यटन विभाग के सचिव और सीधी कलेक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिस पर वन्य प्राणी विशेषज्ञ अजय दुबे ने सवाल खड़े किए हैं।
संजय टाइगर रिजर्व में सीधी जिले में आने वाले सोन घडियाल अभयारण्य रामपुर नैकिन में मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा बिना अनुमति के निर्माण किया गया था। यह निर्माण संजय टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर में स्थित था, जहां निगम ने परसिली रिसॉर्ट के बगल में बड़े किचन और हॉल का निर्माण किया, साथ ही रीवा महाराज की कोठी कठबंगला में 16 कमरों का रिसॉर्ट तैयार किया था। इस बिना अनुमति निर्माण पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह मामला 31 जुलाई को केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित नेशनल वाइल्ड लाइफ स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में पेश किया गया। बैठक में यह अवैध निर्माण पाए गए, जिसके बाद पर्यटन विकास निगम के सचिव और सीधी कलेक्टर से जवाब तलब करने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायत के बाद कार्रवाई
बैठक के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वन्य प्राणी विशेषज्ञ अजय दुबे ने इस मामले की शिकायत की। इसके बाद वन विभाग ने पर्यटन विकास निगम पर वन अपराध में मामला दर्ज किया और 10 दिन के भीतर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए। अब पर्यटन विकास निगम ने वन विभाग से निर्माण को हटाने के लिए समय मांगा है।
अधिकारियों को बचाया जा रहा
वन्य प्राणी विशेषज्ञ अजय दुबे का कहना है कि उन्होंने पर्यटन विभाग के सचिव और सीधी कलेक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि दोनों अधिकारियों पर कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण वह मुख्य सचिव से दोबारा शिकायत करेंगे।