सोयाबीन आंदोलन अब प्रदेश में नए हालात बनाता नजर आ रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा की सतत बैठकों में अब मांगों के लिए दबाव रणनीति पर काम शुरू हो गया है। प्रदेशभर के किसान नेताओं ने एक सुर में इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपनी सहभागिता का ऐलान कर दिया है। गांव, तहसील, जिला मुख्यालय से घूमकर यह आंदोलन प्रदेश की स्टेट और नेशनल हाईवे से होते हुए किसान राजधानी घेराव तक पहुंचने वाले हैं।
जानकारी के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेश भर के किसान नेताओं ने भोपाल में बैठक की है। जिसमें प्रदेशभर के 26 किसान संगठन शामिल थे। इस दौरान किसान नेताओं ने कहा कि सोयाबीन भाव को लेकर मुहिम गांव से चालू हुई। जिसमें गांव गांव में ज्ञापन दिए गए। मुहिम आगे बढ़ी तो तहसील व जिला मुख्यालय पर भी ज्ञापन दिए गए। लेकिन सरकार सोयाबीन 6000 की मांग को अब तक मानने को तैयार नहीं है।
बनी अगली रणनीति
संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक में आगामी आंदोलन कि रणनीति तय कर ली है। इसके तहत 24 से 30 सितंबर तक प्रदेशभर में गांव गांव मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद एक अक्टूबर को पूरे प्रदेश में तहसील व जिला स्तर पर 12 से 3 बजे तक स्टेट व नेशनल हाईवे पर चक्का जाम किया जाएगा। इसके बाद भी सरकार ने किसानों की मांगें नहीं मानी तो राजधानी का घेराव किया जाएगा।
स्थिति स्पष्ट करे सरकार
संयुक्त किसान मोर्चा सदस्य इरफान जाफरी ने कहा कि MSP की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। जबकि राज्य सरकार का इसमें कोई रोल नहीं होता है। वर्तमान MSP की घोषणा जून 2024 में की जा चुकी है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा MSP घोषणा का श्रेय लेना पूर्णता अनुचित व भ्रम फैलाने वाली बात है। मोर्चा नेताओं ने कहा कि हमारा प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री से कहना है कि आप अपनी तरफ से किसानों को घाटे से बचाने के लिए क्या देंगे, इस पर बात कीजिए।
यह उठी मांग
किसान नेताओं ने मांग की है कि राज्य सरकार अपनी ओर से 1108 का बोनस दे। साथ ही शत प्रतिशत खरीदी करे। किसान नेताओं ने एक अक्टूबर को शुरू होने वाले भाव आंदोलन का देह वाक्य "फसलों का दाम दो, नहीं तो सड़कें थाम दो।" दिया है।