मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) में वित्तीय अनियमिताओं के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। परिषद के महानिदेशक (डीजी) डॉ. अनिल कोठारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब नया मामला सामने आया है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन के इंजीनियर चंद्रभान सिंह उईके को वित्त विशेषज्ञ बना दिया है। इसके बाकायदा प्रभारी प्रशासन की तरफ से आदेश निकाले गए हैं। जबकि शासन द्वारा भेजे गए वित्त सेवा के अधिकारी कैलाश नागिया को इस जिम्मेदारी से दूर रखा गया है। वह लेखा शाखा में कथित वित्त विशेषज्ञ इंजीनियर के अधीनस्थ कार्य करने को मजबूर हैं। हद तो यह है कि मेपकॉस्ट की सेवा उपार्जन और क्रय समितियों में नामित वित्त विशेषज्ञ के स्थान पर वित्त विशेषज्ञ के रूप में इंजीनियर हस्ताक्षर कर रहा है। सूत्रों के अनुसार इसको लेकर कुछ सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई तो उनको भी डीजी ने चुप करा दिया। अब डीजी कोठारी पर आरोप लग रहे हैं कि वह उनके इशारों पर काम करने वालों को बिना योग्यता कोई भी जिम्मेदारी दे रहे हैं। फिर अपने अनुसार फाइलों पर टीप लिखवाते हैं।
वित्त अधिकारियों के अभिमत नजरअंदाज
वित्त अधिकारी कैलाश नागिया को लेखा का पूर्ण प्रभार नहीं दिया गया है। उनका उइके के अधीन कार्य कराया जा रहा है। परियोजना खर्चों की फाइलें भी उनके पास नहीं भेजी जा रही हैं। उनकी फाइलों पर लिखी टीपों को नजरअंदाज किया जा रहा है और उसके ऊपर लेखा प्रभारी के रूप में इंजीनियर द्वारा वित्त से संबंधित टीपें लिखकर फाइलों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वित्त विशेषज्ञों की नियुक्तियों पर सवाल
पिछले वर्षों में मेपकॉस्ट में सेवा उपार्जन एवं क्रय समितियों में वित्त विशेषज्ञ के रूप में केवल कोष एवं लेखा या वित्त के जानकार अधिकारियों को नियुक्त किया जाता रहा है। परंतु, इस बार वित्त सेवा अधिकारी के परिषद में नियुक्त होने के बावजूद नजर अंदाज कर इंजीनियर को वित्तीय विशेषज्ञ की भूमिका सौंपी गई। इससे पहले कोष एवं लेखा के अधिकारी आर एस मुजाल्दा, अमिता श्रीवास्तव वित्त विशेषज्ञ के रूप में कार्य करती रहीं, लेकिन उनके जाने के बाद इंजीनियर उइके को लेखा का प्रभारी एवं वित्त विशेषज्ञ बनाने का आदेश जारी कर दिया गया।
टीप में अनियमितता, कोर्ट बोला कोई मामला ही नहीं
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र शिवहरे पर 8.37 लाख रुपये के भुगतान संबंधी वित्तीय अनियमितता का आरोप भी इंजीनियर चंद्रभान उईके की टिप्पणी के आधार पर लगाया गया था। इस मामले में हाईकोर्ट जबलपुर ने टीप दी थी कि जब भुगतान हुआ ही नहीं तो अनियमितता का कोई मामला नहीं बनता। जबकि डीजी ने डॉ. शिवहरे को निलंबित किया था। बता दें, इस मामले में डॉ. शिवहरे ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 27 लाख रुपये के टेंडर घोटाले में सहयोग करने से मना करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। डॉ शिवहरे ने कहा कि कहा कि कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में कह दिया था कि वित्तीय अनियमितता का कोई मामला नहीं बनता।
मैं दायित्व का निर्वहन करना जानता हूं
इस मामले में चंद्रभान उईके से जब उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि 'मैं ज्याग्राफी और आर्ट वाला नहीं हूं', इंजीनियर हूं। जो भी दायित्व सौंपा जाएगा उसका निर्वाहन कैसे करना चाहिए, जानता हूं।
आप डीजी डॉ. अनिल कोठारी से बात करें
वहीं, मेपकॉस्ट के वित्त अधिकारी कैलाश नागिया ने इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में आप मेपकास्ट के डीजी डॉ. अनिल कोठारी से बात कीजिए।
डीजी ने चुप्पी साधी
महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी से इस मामले पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
डीजी के इशारों पर चहेतों को मिलते हैं प्रभार
मेपकॉस्ट के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र शिवहरे ने कहा कि डीजी डॉ. कोठारी अपने इशारों पर काम करने वालों को जिम्मेदारियां सौंपते हैं। मेरे मामले में भी डीजी द्वारा नियम विरुद्ध जाकर चंद्रभान उइके से ही टीप लिखवाई गई थी।