मध्य प्रदेश में मुसलमानों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दिग्विजय सिंह के सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की स्थिति को एससी-एसटी से नीचे बताने वाले बयान के बाद, पूर्व प्रोटेम स्पीकर और विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह 'नए जिन्ना' बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव में गणपति महाराज की पूजा कर सद्बुद्धि मांगनी चाहिए ताकि वे जनकल्याण के कार्यों पर ध्यान दे सकें।
रामेश्वर शर्मा ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस का शासन 50-52 साल तक रहा, तब कितने मुसलमान कलेक्टर, डॉक्टर, या एसपी बने? उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह और कुछ तथाकथित मौलवी मुसलमान बच्चों को शिक्षा से वंचित रखते हुए जिहादी बना रहे थे, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाए।
शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि जाटव, यादव, भील और अन्य जनजातियों का आरक्षण समाप्त कर मुसलमानों को दे दिया जाए। उन्होंने सवाल किया कि अनुसूचित जाति और जनजातियों ने दिग्विजय सिंह का क्या बिगाड़ा है? ये जातियाँ तो जीवन भर कांग्रेस की सेवा करती रही हैं, फिर उनका आरक्षण छीनकर मुसलमानों को क्यों देना चाहते हैं?
शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर दिग्विजय सिंह मुसलमानों का समर्थन करना चाहते हैं, तो अपने राघौगढ़ की सीट या राहुल और प्रियंका गांधी के निर्वाचन क्षेत्र से मुसलमानों को चुनाव लड़वा दें। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मुसलमानों के प्रति इतना लगाव है, तो कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष मुसलमान को बना दें, और तब कांग्रेस और मुसलमानों की प्रगति का पता चलेगा। यह विवाद तब शुरू हुआ जब भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित 'एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स' के कार्यक्रम में, दिग्विजय सिंह ने मुसलमानों की सरकारी नौकरियों में स्थिति पर बयान दिया था।