राज्य में गिरते राजस्व संग्रह को लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अफसरों को कड़ा संदेश दिया है। रेवेन्यू कलेक्शन की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि स्टील और गुटखा–सुपारी जैसे व्यवसायों में बड़े स्तर पर जीएसटी चोरी हो रही है और इसमें प्रभावशाली कारोबारी शामिल हैं। ऐसे मामलों में आधे-अधूरे कदम नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि टैक्स लीकेज के कारण ही राज्य अपने राजस्व लक्ष्य से पीछे है और इसे रोकना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
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बैठक में वित्त विभाग ने बताया कि नवंबर 2025 तक टैक्स कलेक्शन में लगभग 6000 करोड़ रुपये की कमी हुई है। सीएस ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे तुरंत शॉर्टफॉल के कारणों का पता लगाएं, राजस्व रोके जाने के बिंदु चिन्हित करें और नए स्रोतों से आय बढ़ाने की योजना बनाएं, ताकि मार्च 2026 तक निर्धारित लक्ष्य हासिल किया जा सके। विशेष ध्यान जीएसटी कलेक्शन पर रखने के लिए कहा गया। अधिकारियों ने बैठक में यह भी बताया कि जीएसटी स्लैब में बदलाव से संग्रह प्रभावित हुआ है। हालांकि, मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक ढिलाई को दूर करना भी आवश्यक है।
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राज्य में नगरीय करों, खासकर प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली भी कमजोर पाई गई। कई जगह लक्ष्य का केवल आधा ही संग्रह हो पाया है। कुछ जिलों में छोटे प्लॉट की रजिस्ट्रियों पर रोक से भी राजस्व प्रभावित हो रहा है। उज्जैन और ग्वालियर में महंगी गाड़ियों पर दी जाने वाली छूट की जांच पर भी सवाल उठाए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह देखा जाए कि यह छूट किन लोगों को दी गई और क्या नीति सही है। सीएस ने अंत में सभी विभागों को स्पष्ट कर दिया कि राजस्व संग्रह में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।