मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर आईटी पार्क का निर्माण किया जाए। इसमें इंदौर, उज्जैन और रीवा प्रमुख स्थान होंगे। सभी आईटी प्रोजेक्ट्स के लिए कार्यों की समय-सीमा निर्धारित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने शासकीय विभागों को जन-कल्याण के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने अवैध वृक्ष कटाई, खनन, और पुलिस पेट्रोलिंग में ड्रोन का प्रयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, वन क्षेत्रों में शिकार की घटनाओं पर नजर रखने के लिए भी ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। डॉ. यादव ने उज्जैन में डोंगला वेधशाला को आईआईटी इंदौर से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि रिसर्च एवं डेवलपमेंट पाठ्यक्रम विकसित किया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के अध्ययन के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई और कहा कि स्कूल-कॉलेजों के छात्रों को वेधशालाओं का भ्रमण करवाया जाए।
सायबर सुरक्षा एमपीएसईडीसी को जिम्मेदारी दें
मुख्यमंत्री ने साइबर सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम (एमपीएसईडीसी) को जिम्मेदारी सौंपने की बात की। उन्होंने सिंहस्थ-2028 के लिए नगरीय प्रशासन विभाग के आईटी प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी भी एमपीएसईडीसी को दी। इसके अलावा, उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेजों को आईटी के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि दिसंबर में वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला के ऑटोमेशन का शुभारंभ होगा। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस और मध्यप्रदेश कारीगर विज्ञान सम्मेलन 2025 में आयोजित होंगे, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल होंगे