प्रदेश में पहले चरण की छह सीटों पर मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों ने अपना फोकस दूसरे चरण की छह सीटों पर कर लिया है। दूसरे चरण में खजुराहो, दमोह, टीकमगढ़, होशंगाबाद, रीवा और सतना में 26 अप्रैल को मतदान है। इन छह सीटों में से पांच पर तो अभी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला है, लेकिन खजुराहो में भाजपा के सामने कोई मुख्य पार्टी नहीं है। सतना में नारायण त्रिपाठी ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।
सतना: जिधर ब्राह्मण, उधर जीत
सतना लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां पर भाजपा ने सांसद गणेश सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाह को उतारा है। वहीं, बसपा से पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी मैदान में है। विधानसभा चुनाव में कुशवाह ने गणेश सिंह को हराया था। अब फिर दोनों आमने-सामने है। विधानसभा चुनाव में कुशवाह ने गणेश सिंह को चुनाव हराया था। वहीं, पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को बसपा वोटों को सहारा है। ब्राह्मण वोट भी उनको मिल सकते है। त्रिपाठी के चुनाव लड़ने और गणेश सिंह के खिलाफ जनता की नाराजगी से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई। कुर्मी वोट गणेश सिंह और कुशवाह वोट सिद्धार्थ को मिलेंगे, जिनकी हिस्सेदारी लगभग बराबर है। अब 22 प्रतिशत ब्राह्मण वोटर जीत हार तय करेंगे।
खजुराहो : वीडी को वॉकओवर
खजुराहो में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा मैदान में है। यहां पर कांग्रेस ने इंडी गठबंधन के अपने सहयोगी समाजवादी पार्टी को टिकट दी थी, लेकिन मीरा यादव का नामांकन रद्द हो गया। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी वीडी शर्मा को इस सीट पर वॉकओवर मिल गया। हालांकि, इंडी गठबंधन ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रत्याशी आरबी प्रजापति को समर्थन दिया है। फिर भी चुनाव एकतरफा माना जा रहा है। इस सीट पर 1989 से भाजपा का दबदबा रहा है।
रीवा: मिश्रा के बीच कांटे की टक्कर
रीवा में जनार्दन मिश्रा को फिर भाजपा ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने पार्टी के विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा मैदान में है। ये दोनों किसी समय भाजपा के सदस्य थे। इस सीट पर भाजपा मोदी के चेहरे को आगे रखकर चुनाव लड़ रही है। वहीं, कांग्रेस को स्थानीय मुद्दों का सहारा है। जनार्दन तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। इसलिए उनके खिलाफ थोड़ी नाराजगी है। यहां पर मुकाबला कांटे की टक्कर वाला हो गया है।
टीकमगढ़ : स्थानीय बनाम बाहरी बना मुद्दा
टीकमगढ़ सीट पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने पंकज अहिरवार पर दांव लगाया है। वीरेंद्र कुमार सात बार के सांसद हैं, उनके खिलाफ नाराजगी बताई जा रही है, लेकिन मोदी के नाम पर लोग भाजपा को पसंद कर रहे हैं। वहीं, अहिरवार नए हैं, उनसे लोग परिचित नहीं हैं। यही कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यहां पर अहिरवार वोटर्स की संख्या पांच लाख के करीब है। कांग्रेस यहां पर स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है।
दमोह: लोधी बनाम लोधी में टक्कर
दमोह में भाजपा ने कांग्रेस से गए पूर्व विधायक राहुल लोधी को उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी को टिकट दिया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। यहां पर लोधी वोटर निर्णायक होता है। भाजपा को मोदी का चेहरे और लोधी प्रत्याशी होने का फायदा मिल रहा है। भाजपा में जयंत मलैया और प्रहलाद पटेल गुट एकजुट होकर चुनाव लड़ रहा है। भाजपा बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा उठा रही है, जबकि कांग्रेस बिकाऊ वर्सेस टिकाऊ के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। इसका भाजपा को फायदा है।
होशंगाबाद: भाजपा के गढ़ में संजय लगा पाएंगे सेंध ?
होशंगाबाद सीट पर भाजपा ने दर्शन सिंह को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के संजय शर्मा से है। शर्मा दो बार के विधायक हैं। वे भाजपा में रहे हैं। वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं, लेकिन क्षेत्र भाजपा का गढ़ है। मोदी के चेहरे का लाभ दर्शन सिंह को मिल रहा है। इस क्षेत्र की सभी आठ सीटें भाजपा के पास हैं। इस क्षेत्र से प्रहलाद पटेल, राव उदय प्रताप सिंह और नरेंद्र शिवाजी पटेल तीन मंत्री आते हैं। ऐसे में भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है।