प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों के समग्र विकास के उद्देश्य से एक नई पहल की है। राज्य के स्कूलों में अब हर महीने कम से कम एक शनिवार को "बैगलेस-डे" का आयोजन किया जाएगा। इस दिन विद्यार्थियों को बिना बस्ते के विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बैगलेस-डे की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार की जा रही है, ताकि बच्चों में 21वीं सदी के कौशल जैसे संवाद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और साक्ष्य आधारित सोच का विकास हो सके। इसके अलावा, बच्चों में भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरणीय चेतना को भी बढ़ावा दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक बैगलेस-डे के लिए गतिविधियों का कैलेंडर तैयार करेंगे। गतिविधियों की जानकारी को फोटो के माध्यम से राज्य शिक्षा केंद्र के ई-मेल आईडी पर भेजने का भी निर्देश दिया गया है।
यह है बैगलेस डे का उद्देश्य
बैगलेस-डे का उद्देश्य बच्चों को नवाचारी, जिम्मेदार और कुशल नागरिक के रूप में तैयार करना है। इसमें उनके बीच संवाद, विचारों की अभिव्यक्ति, स्वास्थ्य, पोषण, खेलों में सहभागिता और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन दिनों बच्चों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
बैगलेस-डे में यह गतिविधियां होंगी
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस दिन बच्चों को ऑर्ट और क्रॉफ्ट में ड्राइंग, पेंटिंग, मिट्टी के खिलौनों का निर्माण, डॉल-मेकिंग और अनुपयोगी सामग्री से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण जैसी गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलेगा। साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में लोकगीत-नृत्य, लघु नाटिका, कविता पाठ, कहानी लेखन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इसके साथ ही, बच्चों को खेती की आधुनिक पद्धतियां जैसे पॉलीफॉर्मिंग, ऑर्गेनिक फॉर्मिंग और औषधीय पौधों की जानकारी देने के लिए सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, बच्चों को स्थानीय उद्योगों, ऐतिहासिक स्थलों, और सरकारी कार्यालयों जैसे बैंक, पुलिस थाना, अस्पताल और अनाज मंडी का भ्रमण कराया जाएगा।