भाजपा की राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब पार्टी में प्रदेश प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नियुक्तियों का इंतजार है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम के ऐलान के बाद कुछ राज्यों में प्रभारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व ने संकेत दिया है कि बाकी नाम भी समय-समय पर जारी किए जाएंगे। ऐसे में प्रदेश भाजपा के संगठन में भी संभावित बदलाव को लेकर नजरें दिल्ली पर टिकी हैं।मध्य प्रदेश के मौजूदा प्रभारी महेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश से आते हैं। इन दिनों उनकी सक्रियता उत्तर प्रदेश में ज्यादा दिखाई दे रही है। वे यूपी में लगातार दौरे कर रहे हैं और संगठन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में उनकी आगे की भूमिका को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं, मध्य प्रदेश के सह-प्रभारी सतीश उपाध्याय दिल्ली के विधायक हैं। इसके साथ ही वे दिल्ली जल बोर्ड से जुड़ी जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इन दोनों जिम्मेदारियों के चलते उनकी व्यस्तता भी बढ़ी हुई है। ऐसे में मध्य प्रदेश के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी की मौजूदा व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी या बदलाव होगा, इस पर नजर है।
ये भी पढ़ें-
MP News: सरकारी खजाने पर नजर रखने वालों पर शिकंजा, 530 से ज्यादा पर FIR; 223 करोड़ की रकम वापस
चुनावी राज्यों के हिसाब से तय होंगी जिम्मेदारियां
भाजपा के सामने अगले चरण में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पार्टी संगठन के अनुभवी नेताओं को चुनावी राज्यों में जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है। नए प्रभारियों की नियुक्ति में चुनावी जरूरत, संगठनात्मक अनुभव और संबंधित राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सकता है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया फिलहाल महाराष्ट्र के सह-प्रभारी हैं। इसलिए नई सूची में उनकी जिम्मेदारी को लेकर भी पार्टी नेताओं की नजर बनी हुई है।
ये भी पढ़ें-
MP News: वन विभाग में 4506 कर्मचारियों की पदोन्नति, सीएम यादव बोले- खाली पदों पर नई भर्ती के आदेश दिए गए हैं
अंदरखाने वरिष्ठ नेताओं की नई भूमिका पर चर्चा
राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को जगह नहीं मिलने के बाद उनकी आगे की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। दोनों अनुभवी नेताओं को पार्टी दूसरे राज्यों में संगठनात्मक या चुनावी जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि, भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी चुनावी राज्यों में उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता का इस्तेमाल कर सकती है।