मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद माहिर एडवोकेट ने कहा, क्या मुसलमानों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, जो गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के ज़िलों में श्रीगणेश चतुर्थी के जुलूस पर बिना सोचे समझे पत्थर फेंक रहे हैं।
देश और प्रदेश में बसने वाला मुसलमान अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है...अपने ही त्योहारों को मनाने निकलता है तो पत्थर उछालता है...दूसरे समुदाय के धार्मिक स्थलों के सामने आपत्तिजनक नारे लगाता है...! इतने हास्यास्पद हालात पहले कभी नहीं देखे गए और यह जरूर हो सकता है कि आने वाले समय इससे भी ज्यादा बुरे दिन बन जाएं।
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मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद माहिर एडवोकेट ने कहा कि क्या मुसलमानों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, जो गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के ज़िलों में श्रीगणेश चतुर्थी के जुलूस पर बिना सोचे समझे पत्थर फेंक रहे हैं। यह जानते हुए भी की इसके घातक परिणाम घर बुलदोज होने और एनएसए जैसी कार्रवाई भुगतनी पड़ती है। यही नहीं मुसलमान अपने ही जश्न ईद मिलादुन्नबी जैसे शांति का जुलूस निकालने की जगह भड़काऊ नारे लगाते हुए माहौल बिगाड़ने के प्रयास भी करते हैं।
मोहम्मद माहिर ने कहा कि पूरे देश में एक जैसी हो रही घटनाएं इस तरफ इशारा कर रही हैं कि मुसलमानों के खिलाफ़ एक प्रायोजित मुहिम चलाई जा रही है, जिसे केंद्र व भाजपा राज्य सरकारों का संरक्षण प्राप्त है। जहां गैर भाजपा शासित राज्य हैं, वहां उपद्रवियों के स्लीपर सेल सक्रिय कर झुंड की शक्ल में मुस्लिम समाज के खिलाफ़ शासन और प्रशासन का घेराव, धरना प्रदर्शन कर उसे पंगु बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि अगले माह देश के कुछ राज्यों में चुनाव होना है, यह सब उसी का नतीजा है।सांप्रदायिक नेता हिंदू, मुस्लिम ध्रुवीकरण करके धर्म के नाम पर चुनाव जीतना चाहते हैं। क्योंकि इनके पास जनता के लिए कोई सकारात्मक योजनाएं नहीं हैं। मोहम्मद माहिर ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री ही सार्वजनिक मंचों से सांप्रदायिक भाषण देने से गुरेज़ न करते हों, तो उनके दल के और किसी नेता से सौहाद्र भाषा की उम्मीद कैसे की जा सकती है? उन्होंने कहा कि अब तक पूरे देश से पत्थरबाज़ी में लगभग छह दर्जन से अधिक मुस्लिम पकड़े गए, जिनमें युवाओं के अलावा बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं को भी आरोपी बनाया गया है।