राजधानी भोपाल स्थित एम्स में 11 महीने की बच्ची के निचले जबड़े के ट्यूमर (ओडोन्टोजेनिकमिक्सोमा ऑफ मैंडिबल) की सफल सर्जरी की गई। बच्ची को एक सप्ताह तक अस्पताल में रखकर देखभाल की गई। पूरी तरह से ठीक होने पर बच्ची को छुट्टी दे दी गई। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह के मार्गदर्शन में ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स की टीम द्वारा बच्ची के निचले जबड़े के ट्यूमर को निकाला गया। विदिशा के रहने वाले बबलू सेहरिया, जो कि पेशे से एक मजदूर हैं, अपनी 11 महीने की बच्ची रितिका सेहरिया को एम्स भोपाल के दंत विभाग में पिछले महीने ले कर आए थे। बच्ची को करीब छह महीने से निचले जबड़े मे सूजन तेजी से बढ़ती जा रही थी। इस वजह से बच्ची को खाने और सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी।
बच्ची के पिता ने बताया कि सूजन करीब 6 महीने में जबड़े का आकार चार इंच से ज्यादा बढ़ गया है। परिजनों ने पहले विदिशा के स्थानीय चिकित्सक को दिखाया था परंतु उसने बडे संस्थान में जल्दी से जल्दी जाने की सलाह दी। परिजन फिर एम्स भोपाल के दंत विभाग में लेकर आए और डॉ. अंशुल राय को दिखाया। जहां बच्ची कि सारी जांचें करने से पता चला कि बच्ची को निचले जबड़े का ट्यूमर है। बच्ची काफी छोटी होने के कारण सर्जरी मे काफी जटिलता थी। सभी जटिलताओं को समझते हुए डॉ. अंशुल राय (एडिशनल प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ डेंटिस्ट्री) और उनके सहायक चिकित्सकों की टीम ने सर्जरी की।
एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. नागभूषण ने कुशलतापूर्वक एनेस्थीसिया दिया। सामान्यता ओडोन्टोजेनिकमिक्सोमा ट्यूमर यंग लोगों में पाया जाता है। 11 महीने के बच्चे में इतना बड़ा ट्यूमर बहुत ही दुर्लभ है। एम्स में पहली बार इतने छोटे बच्चे में इस प्रकार का बड़ा ऑपरेशन किया गया है। बच्ची बहुत छोटी है तो कन्सेर्वटिव एप्रोच से ये सर्जरी की गई। बच्ची के आगे का जीवन प्रभावित ना हो इसलिए निचले जबड़े के संक्रमण मुक्त हिस्से को बचाने का प्रयास किया गया। सर्जरी चार घंटे से भी ज्यादा चली। बच्ची को हफ्ते भर अस्पताल मे रखकर देखभाल की गई। पूरी तरह से ठीक होने पर बच्ची को छुट्टी दे दी गई। इस सफल सर्जरी के लिए एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अजय सिंह ने सर्जन्स को बधाई दी है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत ये ऑपरेशन किया गया। मरीज के पिता का कहना है कि अगर आयुष्मान कार्ड नहीं होता तो इतना बड़ा ऑपरेशन करने में असमर्थ रहते।