मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन आधुनिक भोजनशालाओं का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जिलों के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं से बातचीत कर नई सुविधा के बारे में जानकारी ली। इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, देवास, शिवपुरी, सतना और अशोकनगर के छात्रावासों की छात्राओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहले भोजन बनाने के लिए गैस सिलेंडर की व्यवस्था करनी पड़ती थी या भोजन के लिए दूसरी जगह जाना पड़ता था। इसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब छात्रावास में ही आधुनिक मेस शुरू होने से यह परेशानी दूर होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ छात्रावासों में भी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
ये भी पढ़ें-
एमपी सुगम यात्री परिवहन सेवा: बस में सीसीटीवी-पैनिक बटन, लाइव लोकेशन भी दिखेगी; कमांड सेंटर से होगी निगरानी
13,500 करोड़ खर्च, पांच करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ दशक में पिछड़ा वर्ग विद्यार्थियों के लिए 13,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि खर्च की गई है। इस अवधि में पांच करोड़ से ज्यादा पिछड़ा वर्ग विद्यार्थियों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिलने का दावा सरकार ने किया है।
ये भी पढ़ें-
सात शहरों की 351 बसों को गडकरी-सीएम कल दिखाएंगे हरी झंडी; 21 साल बाद सुगम परिवहन सेवा का आगाज
टर्न की प्रोजेक्ट से तैयार हुआ किचन और डाइनिंग हॉल
पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर ने बताया कि छात्रावासों में आधुनिक मेस के साथ किचन और डाइनिंग हॉल भी तैयार किए गए हैं। यह काम टर्न की प्रोजेक्ट के तहत कराया गया है। उनका कहना है कि इससे दूर-दराज के गांवों और दूसरे क्षेत्रों से पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों को परिवार से दूर रहते हुए भोजन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। प्रदेश में वर्तमान में पिछड़ा वर्ग के छात्रावासों में करीब 9 हजार सीटें हैं। इनमें लगभग 5200 सीटें बालकों और 3800 सीटें बालिकाओं के लिए हैं। विभाग के अनुसार जिला स्तरीय पोस्ट मेट्रिक छात्रावास शुरू होने के बाद पहली बार यहां विद्यार्थियों के लिए मेस की सुविधा शुरू की गई है।