मध्यप्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बुधवार को पीसीसी में लोकसभा चुनाव को लेकर अपना न्याय पत्र जारी किया। इस दौरान सभी नेताओं ने अलग-अलग मुद्दों पर मीडिया से चर्चा की। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और अजय सिंह (राहुल भैया) को छोड़कर सभी वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने न्याय पत्र को भारत के भविष्य का रोडमैप बताया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिस्सेदारी पता करने के लिए जाति आधारित गणना कराएंगे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव ने बताया कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाएगी। फसल बीमा की राशि 30 दिन के अंदर दी जाएगी। जिला स्तर पर कृषि विश्वविद्यालय खोले जाएंगे। नारी न्याय को लेकर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल ने बताया कि महालक्ष्मी योजना लागू करके प्रत्येक गरीब परिवार की एक महिला को वार्षिक एक लाख रुपये दिए जाएंगे। केंद्र सरकार की नौकरी में 50 प्रतिशत आरक्षण के साथ पंचायतों में अधिकार मैत्री की नियुक्ति होगी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वन अधिकार नियम को लेकर राष्ट्रीय मिशन स्थापित होगा। छात्रवृत्ति दोगुनी और बैकलॉग की भर्ती एक साल के भीतर की जाएगी। जहां आदिवासियों की आबादी अधिक है, उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष जेपी धनोपिया ने बताया कि श्रमिकों को प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये दी जाएगी।
जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा
कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने संवैधानिक न्याय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कश्मीर के लोगों की बात की जाती है, पर वहां चुनाव तक नहीं कराए जा रहे हैं। मणिपुर में क्या वाकई लोगों के साथ न्याय हो रहा है। हम जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। संसद की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। वहां विपक्ष को अपना एजेंडा रखने का मौका नहीं मिलता है। जब हमारे प्रस्ताव स्वीकार नहीं होते और आसंदी के सामने आते हैं तो निष्कासित कर दिया जाता है। मैं इसे प्रजातांत्रिक नहीं मानता हूं और इस तरह की व्यवस्था में रहना नहीं चाहता हूं। इसको लेकर उप राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा है।
विवेक तन्खा ने कहा, हम सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम 100 दिन संसद चले। सप्ताह में एक दिन विपक्ष को अपने विषयों पर चर्चा करने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी। न्यायालयों में तीन करोड़ मामले लंबित हैं। राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की स्थापना की जाएगी, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार होगा। कांग्रेस चुनाव न लड़ पाए, इसलिए पूरा पैसा फ्रीज कर दिया जाता है। सरकारें आएंगी-जाएंगी पर लोकतंत्र को बचाने के लिए कानून को ठीक करना पड़ेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सांसद विवेक तन्खा, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जेपी धनोपिया और विभा पटेल शामिल थीं।
ये हैं प्रमुख घोषणाएं
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10वीं अनुसूची में संशोधन का वादा। इसके तहत दल बदल करने पर विधानसभा या संसद की सदस्यता खुद समाप्त हो जाएगी।
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पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां सख्ती से कानून के अनुसार काम करेंगी। हर मामले को संसद या राज्य विधान मंडलों की निगरानी में लाया जाएगा।
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वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध। लोकसभा और विधानसभा चुनाव तय समय पर ही करवाएंगे।
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मतदान ईवीएम के जरिए होंगे, लेकिन वीवीपैट की पर्ची से मिलान किया जाएगा।