पूर्व आईएएस और रेरा चेयरमैन अजीत प्रकाश श्रीवासतव
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मध्य प्रदेश के रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के चेयरमैन अजीत श्रीवास्तव पर लग रहे आरोपों की जांच अब हाईकोर्ट के जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी करेंगे। यह जांच रेरा एक्ट की धारा 26 के तहत शुरू की गई है और ईओडब्ल्यू ने भी इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। अजीत श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने रेरा में कई भर्तियां की और बिल्डरों को परेशान किया। उनके खिलाफ कई बिल्डरों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिकायत की थी और उन्हें हटाने की मांग की थी। हालांकि, रेरा एक्ट के तहत रेरा चेयरमैन को हटाने के लिए हाईकोर्ट द्वारा जांच कराई जाती है। इस मामले में सरकार ने विधि विभाग से सहमति के बाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से जांच के लिए जस्टिस भट्टी को नियुक्त किया है।
जस्टिस भट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकार श्रीवास्तव को हटाने का फैसला ले सकती है। बता दें कि इससे पहले रेरा के पूर्व चेयरमैन एंटोनी डिसा को भी समय से पहले हटाया गया था, हालांकि वह स्वेच्छा से हटे थे। भोपाल के प्रभाष जेटली की शिकायत पर ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज की है। श्रीवास्तव पर रेरा में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी करने का आरोप है। साथ ही जेटली ने शिकायत की है कि आकृति डेवलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड के आकृति गार्डंस प्रोजेक्ट में श्रीवास्तव और उनकी पत्नी नीति श्रीवास्तव ने आवासीय भूखण्ड नं. बी-168 लिया है। इसके साथ रेरा अध्यक्ष की हैसियत से श्रीवास्तव ने आकृति डेवलिंक्स के सभी प्रोजेक्ट को रद्द भी कर दिया, जबकि श्रीवास्तव को आकृति डेवलिंक्स के प्रोजेक्ट को रेरा अध्यक्ष की हैसियत से सुनवाई नहीं करनी थी।। आरोपों के मुताबिक, श्रीवास्तव ने बिना सरकारी अनुमति के कई भर्तियां कीं और बिल्डरों के प्रोजेक्ट को अनावश्यक रूप से लटकाया। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करते हुए शिकायतों की जांच शुरू कर दी है। वहीं, रेरा सचिव ने ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया और कहा कि रेरा ने सभी नियुक्तियां नियमों के अनुसार की थीं।