मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में रेत खनन का मुद्दा गरमाने लगा है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत कर रेत खनन की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से महासचिव राजकुमार सिंह ने मुख्य निर्वाचन पधाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने खनन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से अपील की है कि वे रेत खदानों की नीलामी प्रक्रिया पर अपनी नजर रखें। कांग्रेस ने इस प्रकिया में गड़बड़ होने की आशंका जाहिर की है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की घोषणा से साथ प्रदेश में लागू हुई आदर्श आचार संहिता से समूचे मध्यप्रदेश में रेत (बालू) की टेंडर प्रक्रिया अटक गई है।
यह है आशंका
कांग्रेस ने आशंका जताई है कि प्रदेश के किसी भी ठेकेदार का एग्रीमेंट खनिज विभाग से नहीं हो पाया है। ऐसे ने खनिज विभाग के अफसर और वरिष्ठ अधिकारी, अपने करीबियों से सांठ-गांठ कर आचार संहिता से पूर्व की डेट में एग्रीमेंट पूर्ण करने की प्रक्रिया को अंजाम दे सकते हैं।
नहीं हो पाया एग्रीमेंट
कांग्रेस का कहना है कि एनजीटी की रोक भले ही हट गई हो, लेकिन अभी एक भी रेत खदान शुरू नहीं की जा सकी है। वजह टेंडर प्रक्रिया नहीं होना। बताया जा रहा कि माइनिंग कॉर्पोरेशन को इस बार रेत ठेकेदारों को एग्रीमेंट कराकर देने की बात हुई थी, पर अभी तक कॉर्पोरेशन ने एग्रीमेंट नहीं किया है। ऐसे में प्रदेश की रेत खदानों में खनन शुरू नहीं हो सका है।
चुकाने पड़ सकते हैं अधिक दाम
इधर, कहा जा रहा है कि मौजूदा समय आम लोगों को निर्माण कार्य के लिए सस्ती रेत मिलने की संभावना खत्म हो गई है। अब जब तक नए सिरे से एंवायरमेंट इम्पैक्ट असेस्मेंट अथॉरिटी (सिया) से मंजूरी नहीं मिल जाती है और टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक रेत खरीदने के लिए लोगों को अपनी जेब ज्यादा खाली करनी पड़ेगी।