मध्यप्रदेश में वर्षों से अटकी सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को साफ संदेश दिया है। कृषि विभाग के प्रमोशन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी डीपीसी करना ही भूल गए थे और पुराने रिकॉर्ड तक नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा कि “जो मर्जी आए करना पड़े, लेकिन प्रमोशन तो करना पड़ेगा, उसको छोड़ नहीं सकते।” मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह भी स्पष्ट किया कि अब पुराने प्रमोशन की फाइलें निपटाना ही पर्याप्त नहीं होगा। हर साल डीपीसी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, ताकि कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए कई साल इंतजार न करना पड़े। उन्होंने चालू वर्ष की डीपीसी भी इसी साल कराने के निर्देश दिए।
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प्रमोशन के बाद पद खाली होंगे, भर्ती भी साथ चले
सीएम ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन देने के बाद नीचे के पद खाली होंगे। ऐसे में केवल पदोन्नति से काम नहीं चलेगा, बल्कि नई भर्ती की प्रक्रिया भी लगातार चलानी होगी। उन्होंने इसे गंगा की धारा से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह गंगा लगातार बहती है, उसी तरह प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति और भर्ती की प्रक्रिया भी लगातार चलती रहनी चाहिए। सरकार की कोशिश रहेगी कि किसी विभाग में कर्मचारियों की कमी न हो।
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जीएडी पर सीएम का तंज- जलेबी की दुकान ही बंद कराएंगे
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी की पुरानी कार्यप्रणाली पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि भगवान के बाद कर्मचारियों को जिस विभाग से डर लगता था, वह सामान्य प्रशासन विभाग था। CM ने तंज कसते हुए कहा, “भगवान जाने वहां कौन सी जलेबी बनती थी। हमने कहा जलेबी की दुकान ही बंद कराएंगे।” मुख्यमंत्री का इशारा सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता और फाइलों के लंबे समय तक अटकने की तरफ था। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को सरल बनाना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो।
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कृषि विभाग में 1500 से ज्यादा पदों पर भर्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग में इसी साल अलग-अलग माध्यमों से 1500 से ज्यादा पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल के जरिए होने वाली भर्तियों के अलावा उप अभियंता, कृषि सचिव, डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत अन्य पद शामिल हैं। सीएम के मुताबिक, मौजूदा कार्यकाल में अब तक करीब 85 हजार पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य अगले साल तक प्रदेश के अलग-अलग विभागों में एक लाख नए पदों पर भर्ती करने का है।
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कृषि विभाग के 3357 कर्मचारियों को प्रमोशन
कृषि विभाग में लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया के तहत कुल 3357 कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया है। इनमें एक चरण में 1725 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक कृषि विभाग मंडल के 1439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के 8 कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है।
अनुकंपा नियुक्ति पर भी सीएम का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी सरकार के परिवार का हिस्सा हैं। किसी कर्मचारी की असमय मृत्यु होने पर उसके परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने बताया कि सरकार ने करीब 300 अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का निराकरण किया है। इनमें 44 आश्रितों को सहायक वर्ग-3 के पद पर नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाकी लंबित मामलों को भी निपटाकर इनकी संख्या शून्य तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा।
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ग्राम सेवक का नाम अब कृषि विस्तार अधिकारी
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कार्यक्रम में बताया कि वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए ग्राम सेवक का पदनाम बदलकर कृषि विस्तार अधिकारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसान परिवार से आते हैं और किसानों की समस्याओं को समझते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कृषि विभाग के कर्मचारियों से नई जिम्मेदारी और नए संकल्प के साथ काम करने का आह्वान किया।
सीएम ने कृषि विभाग को बताया विकास की बड़ी धुरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की बड़ी भूमिका है और कृषि विभाग प्रदेश के विकास की अहम कड़ी है। विभाग का अमला प्रदेश के जिलों और गांवों में सीधे किसानों के बीच काम करता है। गेहूं उपार्जन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का संकलन कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंचा है। इसमें कृषि विभाग के मैदानी अमले की भूमिका अहम रही है।