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एमपी: रिश्वत लेने के आरोपी पटवारी पर अभियोजन की मंजूरी, लोकायुक्त ने मांगी थी मंजूरी; जानें पूरा मामला

Wed, 07 Oct 2026 09:26 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में रिश्वत के आरोपी पटवारी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी होने के बीच भ्रष्टाचार के लंबित मामलों का आंकड़ा भी सामने आया है। विधानसभा की जानकारी के मुताबिक लोकायुक्त के 295 मामलों में जांच पूरी होने के बाद भी अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है।
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भोपाल कलेक्टर ने भ्रष्टाचार के आरोपी पटवारी के खिलाफ दी अभियोजन स्वीकृति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई के दावों के बीच अभियोजन स्वीकृति को लेकर तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। भोपाल में आठ हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोपी पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के खिलाफ जिला प्रशासन ने अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है। वहीं विधानसभा में सामने आई जानकारी के मुताबिक लोकायुक्त के 295 मामले ऐसे हैं, जिनमें जांच पूरी होने के बाद सरकार से अभियोजन की स्वीकृति का इंतजार है।
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कोलार क्षेत्र के पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल पर मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू के एवज में आठ हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त, भोपाल ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। अब एसडीएम स्तर से मिले रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है। जांच रिपोर्ट में सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और भ्रष्टाचार संबंधी कृत्य में प्रथम दृष्टया संलिप्तता का उल्लेख किया गया था। इसके बाद सक्षम स्तर से अभियोजन की अनुमति दी गई।

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एक तरफ कार्रवाई, दूसरी तरफ सैकड़ों मामलों में इंतजार
अभियोजन स्वीकृति का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा में सरकार से पूछे गए सवालों में लोकायुक्त के लंबित मामलों की बड़ी संख्या सामने आ चुकी है। 21 जून 2026 तक की स्थिति पर उपलब्ध विधानसभा संबंधी जानकारी के अनुसार लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने 1 जनवरी 2020 से 21 जून 2026 के बीच 1,318 मामलों की विवेचना पूरी की थी। इनमें 1,302 मामलों में अभियोजन की अनुमति के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रस्ताव भेजे गए। 985 मामलों में स्वीकृति मिली, जबकि 295 मामले स्वीकृति के इंतजार में बताए गए। इन लंबित मामलों में कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। उपलब्ध विभागवार जानकारी में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 36 मामले सबसे अधिक बताए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास के 15, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 12, सामान्य प्रशासन विभाग के 11 और लोक निर्माण विभाग के 10 मामले भी लंबित बताए गए हैं। राजस्व विभाग में छह तथा जल संसाधन विभाग में पांच मामले लंबित हैं। 
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चार साल में 1379 मामले अभी जांच के दायरे में
फरवरी 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2022-23 से उस समय तक लोकायुक्त संगठन में 1884 शिकायतें दर्ज हुई थीं और विशेष पुलिस स्थापना में 1063 आपराधिक मामले पंजीबद्ध किए गए थे। इनमें शिकायत एवं जांच शाखा के 1291 और तकनीकी शाखा के 88, कुल 1379 मामले जांच के दायरे में थे। 1063 आपराधिक मामलों में से 393 की विवेचना पूरी हो चुकी थी और 134 मामलों में अभियोजन स्वीकृति लंबित थी।
 
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