प्राचीन भारतीय सनातन ज्ञान और अद्वैत वेदांत की सार्वभौमिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से “आचार्य शंकर प्रकटोत्सव -एकात्म पर्व” का आयोजन 28 अप्रैल से 2 मई 2025 तक ओंकारेश्वर में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह आयोजन एकात्म धाम परिसर में होगा, जिसे सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक महाकुंभ के रूप में आयोजित किया जा रहा है। संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने बताया कि पर्व का उद्देश्य अद्वैत वेदांत, भारतीय संस्कृति और वैश्विक एकात्मता को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। पर्व का शुभारंभ 28 अप्रैल को सुबह 7 बजे वैदिक अनुष्ठानों से होगा, जिसके बाद नगर में शोभायात्रा निकाली जाएगी।
पांच दिवसीय पर्व में वैदिक अनुष्ठान, शंकर स्तोत्रों का गायन, अद्वैत प्रदर्शनी, वेदांत संवाद सत्र, सांगीतिक प्रस्तुतियां और 10,000 दीपों से नर्मदा आरती जैसे विविध आयोजन होंगे। जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, गौरांग दास प्रभु (इस्कॉन), स्वामी परमानंद गिरि, स्वामी प्रणव चैतन्य पुरी, माँ पूर्णप्रज्ञा जैसे संत इस आयोजन में भाग लेंगे। चिंतक मुकुल कानिटकर, लेखक नीलेश नीलकंठ ओक, और प्रो. गौरी माहुलिकर प्रमुख सत्रों में संवाद करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्व के समापन दिवस 2 मई को विद्वानों के अलंकरण समारोह और 500 शंकरदूतों के दीक्षा संस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। लता मुंशी की भरतनाट्यम प्रस्तुति और शंकर संगीत श्रृंखला इस आयोजन का सांस्कृतिक आकर्षण रहेंगी। पर्व के दौरान प्रतिदिन “अद्वैतामृतम्” संवाद श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसमें अद्वैत वेदांत से जुड़े विचारों पर चर्चा होगी। “एकात्मता की 108 फीट ऊंची प्रतिमा”, अद्वैत लोक संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय वेदांत संस्थान से ओंकारेश्वर भारत के सांस्कृतिक गौरव का नया केंद्र बनता जा रहा है।