मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक है, लेकिन बारिश की गतिविधियां अभी थमी नहीं हैं। उत्तर अंडमान सागर में बन रहे निम्न दाब क्षेत्र के असर से प्रदेश में अगले चार दिन मौसम बदला रह सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, नए सिस्टम की दिशा और उसकी तीव्रता से प्रदेश में बारिश की स्थिति तय होगी। फिलहाल 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। हालांकि मौसम तंत्र मजबूत हुआ तो मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है।
भोपाल में डैम के गेट खोले
भोपाल और आसपास के इलाकों में रातभर हुई बारिश के बाद शनिवार को भदभदा और कलियासोत डैम में पानी की आवक बढ़ी। बड़ा तालाब का जलस्तर बढ़ने पर भदभदा का एक गेट खोला गया। इसके बाद कलियासोत डैम के दो गेट भी खोलने पड़े। उधर, ब्यावरा में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए। अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा। इससे आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। आगर-मालवा जिले में भी कई जगह तेज बारिश हुई। नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के सामने नाले में एक कार बह गई। हादसे में आठ लोगों की मौत हुई।
45 जिलों में बारिश, लटेरी में सबसे ज्यादा
शनिवार को प्रदेश के 45 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश विदिशा के लटेरी में 4.2 इंच हुई। गुना के कुंभराज में 4 इंच, आगर-मालवा के नलखेड़ा में 92 मिमी यानी 3.7 इंच बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा आगर के बड़ौद में 2.9 इंच, गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच और राजगढ़ के खिलचीपुर व आगर शहर में करीब ढाई इंच बारिश हुई। बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में रहा। शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, पांढुर्णा, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, सागर और दमोह में बारिश हुई।
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32 जिलों में अब भी बारिश का आंकड़ा कम
प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में भी बारिश का आंकड़ा अब तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में कमी 5 से 24 प्रतिशत तक है। पिछले एक सप्ताह में तेज बारिश के कारण कई जिलों का आंकड़ा सुधरा है। बाढ़ जैसे हालात वाली बारिश ने भी कमी को कम किया। हालांकि शनिवार तक पूर्वी हिस्से का आंकड़ा फिर करीब 2 प्रतिशत माइनस में पहुंच गया। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में भी बारिश सामान्य से कम है।आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में कमी 5 से 48 प्रतिशत तक है।
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23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इस मानसून सीजन में जून की कम बारिश का असर अब तक बना हुआ है। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन मानसून के दौरान दो बार ब्रेक आने से कई दिन बारिश नहीं हुई।मानसून के आखिरी चरण में सक्रिय मौसमी तंत्र से बारिश बढ़ी, फिर भी जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। प्रदेश में अब तक कुल बारिश सामान्य से करीब 6 प्रतिशत कम है।मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच के बीच रहती है।