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MP Vidhan Sabha Satra: सूट बूट में दिखे बाइक वाले विधायक, परिवार संग पहुंचे लेने शपथ

Mon, 18 Dec 2023 03:29 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

MP Vidhan Sabha Satra: रतलाम के सैलाना से विधायक बने भारत आदिवासी पार्टी (बाप) कमलेश्वर डोडियार सोमवार को विधानसभा में शपथ लेने पहुंचे थे। इस मौके पर उनका परिवार भी मौजूद रहा। बता दें कि विधायक कमलेश्वर डोडियार विधानसभा में सूट बूट में नजर आए है।
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परिवार संग पहुंचे लेने शपथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाइक से रतलाम जिले के सैलाना से भोपाल की 350 किलोमीटर दूरी तय करके चर्चाओं में आए विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनकी चर्चा उनके पहनावे को लेकर है। बाप पार्टी से विधायक बने कमलेश्वर सोमवार को विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए भोपाल पहुंचे थे।

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वे विधानसभा में सूट बूट में नजर आए है। उनके पहनावे को देखकर सभी चकित थे। इससे पहले जब वे कागजी कार्यवाही के लिए विधानसभा पहुंचे थे तो वे साधारण शर्ट पैंट और चप्पल में थे, लेकिन इस बार वे बंद गले के कोर्ट में दिखाई दिए। इतना ही नहीं इस बार वे बाइक की जगह कार से विधानसभा पहुंचे। उनका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा।

कमलेश्वर चर्चा का विषय बन गए थे
बता दें, कमलेश्वर डोडियार निर्वाचित होने के बाद विधानसभा की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अपने मित्र के साथ बाइक से भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने करीब 9 घंटे में यह सफर पूरा किया था। हवाई जहाज में सफर करते उनके फोटो वायरल होने पर भी कमलेश्वर चर्चा का विषय बन गए थे। 
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ये है बैक ग्राउंड
कमलेश्वर ने शुरू में अपनी पढ़ाई उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने वकालत दिल्ली यूनिवर्सिटी से की है। वे एक गरीब परिवार से आते हैं। उनकी पूरी फैमली सैलाना के गांव राधाकुंवा में एक छोटी सी झोपडी में रहती है। तंग हाल कमलेश्वर के पास चुनाव लड़ने तक के पैसे नहीं थे उन्होंने 12 लाख का कर्ज लेकर ये चुनाव लड़ा है। 33 साल के कमलेश्वर के माता पिता मजदूरी करते हैं। उन्होंने खुद लोगों के घर झूठे बर्तन साफ किए हैं। 
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मंत्री बनने की जताई थी इच्छा
कमलेश्वर ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात करके वन मंत्री बनने की इच्छा भी जताई थी। उनका कहना था कि उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाए। इसके साथ ही उन्हें वन मंत्रालय दिया जाए। इसके पीछे उनका तर्क था कि वे वनवासी हैं और वे वनवासियों की समस्याओं को बहुत अच्छे समझते हैं।

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