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मियां भोपाली के झोले-बतोले: एमपी में पीने वाले भी खुश ओर मुखालिफ भी बम-बम!

सार

मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति से सब खुश हैं। जो सरकार में हैं उनके अपने कारण हैं, लेकिन जो आबकारी नीति को लेकर आक्रामक थे, वह भी खुश हैं। सबसे बड़ी बात है कि सरकार उमा भारती के पत्थर का निशाना बदल चुकी है। 
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अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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को खां, अपने एमपी में शिवराजसिंह सरकार ने ने नई शराब नीति के नाम पर एसी हाथ की सफाई दिखाई के सब बम-बम। पीने वाले भी, पिलाने वाले भी ओर शराब की मुखालिफत करने वाले भी। सरकार ने राहत भी दे दी ओर सरकारी खजाने पे आंच भी नई आने दी। वोट भी पके ओर नोट भी छपे। आलम ये हे के पिरदेश में शराब नीति से खफा उमा भारती शिवराज सरकार की नई शराब नीति से खुश होके ‘शराब छोड़ो, दूध पियो’ अभियान चलाने का एलान कर दिया हे। उधर सरकार इस बात में मुस्कुरा रई हे के उसने उमाजी को सियासी ‘भाव’ भी दे दिया ओर अपना सियासी गणित भी साध लिया।

मियां, माजी पिरधानमंतरी पी.वी.नरसिंहाराव के जमाने में एक जुमला खूब चला करता था- ‘हस्तलाघव।’ इसके मानी थे कि सांप भी मर जाए ओर लाठी भी न टूटे। मधपिरदेश में सरकारें पिछले कई सालों से आबकारी की आय बढ़ाने में जुटी थीं। दारू से ज्यादा से ज्यादा पेसा खजाने में आए, इस वास्ते नए-नए खटकरम करे जा रिए थे। इसमें घर-घर दारू पोंचाना, अहातों में बेठ के पीने की सहूलियत देना, घरों में बार खोलने की इजाजत वगेरा। सरकार चाहे शिवराज की हो या कमलनाथ की मकसद एक ई रिया के पिरदेश के अवाम को ओर कुछ मिले न मिले, दारू की किल्लत कतई न हो।

खां, सरकारों ओर अफसरों की ‘मेनत’ रंग लाई। इस साल सरकारी खजाने में दारू ओर बीयर की बिक्री से करीब साढ़े 10 हजार करोड़ रू. जमा हो चुके हें। उधर, बीजेपी की बड़ी लीडर ओर माजी मुखमंतरी उमा भारती लगातार इस समाजी मुद्दे को उठाकर शिवराज सरकार के लिए परेशानी पेदा कर रई थीं। एक दफा तो उन्होंने भोपाल के सरकारी शराब ठेके पे फत्तर मार दिया था। फिर ओर ओरतों को शराबखोरी के खिलाफ संगठित करने लगीं। उन्होंने सूबे में शराबबंदी को लेके आंदोलन की धमकी दी तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डाजी को चिट्ठी भी लिखी। उमाजी ने अपने लोधी होने के तेवर भी दिखाए। मगर शिवराज चुप्पी साधे हुए थे। बाद में ये चर्चा भी चली कि संघ के हेडक्वार्टर से भी बत्ती पड़ी हे। इधर चालू माली साल भी खतम होने पे आ रिया हे। दारू-बीयर ठेकों से भरपूर माल खजाने में आ चुका था। लिहाजा सरकार ने अगले साल की ‘शराब नीति’ का ऐलान कर डाला, क्योंकि पिरदेश में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने हें। नई शराब नीति को लेके हो रिए हल्ले के बीच जानकारों ने बताया कि नई पाॅलिसी में सरकार ने सिरफ इत्ता करा के हे शराब ठेको में बने अहातों में बेठ के पीने पे रोक लगा दी गई हे। बाकी सब बदस्तूर हे। इससे पियक्कड़ों को फायदा ये हेगा के वो ठेके से पौव्वा लेके कहीं पे बेठ के पी सकेंगे। इससे घरों में ओरतों की परेशानी बढ़ सकती हे मगर पीने वालों को हड़काने वाली पुलिस की कमाई बढ़ जाएगी। दूसरा फायदा ये हेगा किे एक ई दुकान पे विदेशी दारू के तमाम बिरांड मिल सकेंगे। ऊपर से हेरिटेज दारू यानी महुए की बनी दारू पे कोई टैक्स नई लगेगा। अलबत्ता सरकार ने इत्ता जरूर करा के जहां पब्लिक विरोध करेगी, वहां दारू की दुकान नई खुलेगी।

मियां, मजेदार बात हे के नई शराब नीति के बाद कमाई के हिसाब से दारू की अहमियत समझने वाले दो बड़े नेता आपस में भिड़ गए हें। माजी सीएम कमलनाथ ने नई शराब नीति के ऐलान के बाद तंज करा के इस सरकार ने मधपिरदेश को ‘मदिरा प्रदेश’ बना दिया हे। यहां राशन मेंहगा, मगर शराब सस्ती हे। कमलनाथजी वोई सीएम हेंगे, जो हकूमत में रेते हुए शराब की ऑन लाइन बिक्री के हामी थे। कमलनाथ के तंज पे शिवराज भड़क गए। उन्होने कमलनाथ पे पलटवार करा के वो ऐसा केह के मधपिरदेश की संस्किरती की बेइज्जती कर रिए हें। इसपे कमलनाथ ने याद दिलाया के पिरदेश को मदिरा प्रदेश तो पेले शिवराज ने ई बोला था। इधर शिवराज सरकार की नई नीति से उमाजी तो इत्ती गदगद हुईं के उन्होंने ताबड़तोड़ एलान कर मारा के वो अब पिरदेश में शराब छोड़ो, दूध पियो’मुहिम चलाएंगीं। ये बात अलग हे एमपी में बीते छह महीने में सांची का दूध भी चार बार मेंहगा हो चुका हे। गरीब दूध से भी मोताज हो रिया हे।

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-बतोलेबाज

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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