फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमपी: शराब के सागर गोल्ड ब्रांड पर रोक का आदेश देकर उलझे जबलपुर के आबकारी अधिकारी, नोटिस देकर मांगा जवाब

Wed, 09 Sep 2026 09:06 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद शराब की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच जबलपुर में ‘सागर गोल्ड’ की बिक्री रोकने वाले सहायक आबकारी आयुक्त को ही नोटिस मिलने से विभागीय कार्रवाई और जिम्मेदारी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
 
विज्ञापन
वल्लभ भवन, भोपाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जबलपुर में सागर गोल्ड शराब की बिक्री पर रोक लगाने के मामले में सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे को नोटिस जारी होने के बाद अब मामला सिर्फ स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं रह गया है। शासन स्तर पर यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर एक सहायक आबकारी आयुक्त ने किस आधार पर पूरे जबलपुर जिले में किसी शराब ब्रांड की बिक्री रोकने का फैसला लिया? और बिना रासायनिक जांच के उसे जहरीली शराब कैसे मान लिया गया? दुबे द्वारा छह सितंबर को जारी मूल आदेश में सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों का हवाला देते हुए जबलपुर की सभी शराब दुकानों पर सागर गोल्ड ब्रांड की शराब के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। आदेश में शराब को जहरीली बताते हुए उसके सेवन से मौत होने की बात भी दर्ज की गई। वहीं, इसी आदेश में दुकानों से नमूने लेकर उनकी जांच फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से कराने और रिपोर्ट आने तक बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए थे। यहीं से आदेश की प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि शराब के नमूने की जांच रिपोर्ट उस समय उपलब्ध नहीं थी तो उसे जहरीला घोषित करने का आधार क्या था? शासन अब इसी बिंदु को गंभीरता से देख रहा है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  मध्य प्रदेश: दुबई में एमपी को 53 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव, सीएम बोले- वेलकम टू मध्यप्रदेश

पीएस की आपत्ति के बाद उसी दिन बदला फैसला
मामले की जानकारी आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर तक पहुंचने के बाद स्थिति बदली। इसके बाद दुबे ने उसी दिन संशोधित आदेश जारी कर दिया। इसमें कहा गया कि जबलपुर जिले में सागर गोल्ड ब्रांड की उपलब्धता नगण्य है। अधिकारियों को सामान्य निरीक्षण और कच्ची शराब के चिन्हित क्षेत्रों में कार्रवाई के निर्देश दिए गए। यानी कुछ ही घंटों में व्यापक प्रतिबंध वाला आदेश सीमित कार्रवाई तक पहुंच गया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  कैंसर मरीजों को बड़ी राहत: विदिशा में शुरू हुआ डे-केयर सेंटर; एम्स और टाटा मेमोरियल के सहयोग से मिली सुविधा

क्या पहला आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था?
अब शासन के सामने मूल सवाल यह है कि क्या सहायक आबकारी आयुक्त दुबे को इस तरह पूरे जिले में किसी ब्रांड की बिक्री पर रोक लगाने का अधिकार था? विभागीय व्यवस्था में ऐसे निर्णय सक्षम स्तर से लिए जाते हैं। ऐसे में बिना अनुमति जारी किए गए आदेश और उसके बाद तत्काल संशोधन को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारी भी तय हो सकती है। इस मामले में शासन से संजीव दुबे को नोटिस जारी किया गया और 15 दिनों में जवाब देने को कहा गया है। इस नोटिस में कहा गया है कि शराब को जहरीला बताया गया और उसके सेवन से सागर में मौत होने की बात लिखी गई है। शराब का रासायनिक परीक्षण भी नहीं कराया गया और ना ही आदेश जारी करने से पहले सक्षम स्वीकृति ली गई।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  दुबई में MP की बड़ी डील की तैयारी: सीएम ने निवेशकों से की मीटिंग, लॉजिस्टिक्स से एजुकेशन तक निवेश पर चर्चा

मौतों के बाद लिया फैसला, अब उसी आदेश पर सवाल
पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि प्रतिबंध का आदेश सागर में हुई मौतों के बाद जारी किया गया था। ऐसे में विभागीय कार्रवाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है जब किसी शराब के सेवन से लोगों की मौतों की आशंका सामने आ रही हो, तब तत्काल बिक्री रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए या पहले औपचारिक जांच और अनुमति का इंतजार? दुबे के आदेश को लेकर विभाग का तर्क नियमों पर आधारित है। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966 के नियम-5 का उल्लंघन माना है। साथ ही, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम-10 के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। 

सागर में मौतों का आंकड़ा 25, प्रशासन ने 15 की पुष्टि की
इधर सागर जिले के जहरीली शराब मामले में एक आरोपी की इलाज के दौरान मंगलवार को मौत हो गई। इसके बाद अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 25 बताई जा रही है, जबकि जिला प्रशासन ने अब तक 15 मौतों की पुष्टि की है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। जहरीली शराब के निर्माण, बिक्री और सप्लाई से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने 30 नामजद आरोपियों में से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 16 हो गई है। सागर पुलिस के अनुसार आरोपी राम सिंह की इलाज के दौरान मौत हुई है। पुलिस के मुताबिक वह कथित तौर पर शराब बेचने के साथ खुद भी उसका सेवन कर चुका था। राम सिंह को पहले बंडा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां मंगलवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।  





 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें