मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर परिवारवाद हावी होता नजर आ रहा है। दरअसल, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने वरिष्ठता क्रम को दरकिनार करते हुए अपनी पत्नी को डॉ. नीरा को प्रभारी संयुक्त संचालक बना दिया। जैसे ही मामला सबके सामने आया, इस पर सियासत शुरू हो गई। इसके बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तंज कसा। कांग्रेस ने कहा कि अंधा बांटे रेवड़ी, फिर अपने-अपने को दे।
यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, 5 जनवरी को मध्यप्रदेश के संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं की अपर संचालक सपना एम. लोवंशी का एक आदेश जारी हुआ। इसमें बताया गया कि भोपाल की जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नीरा चौधरी को क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त संचालक बनाया गया है, जिसके बाद राजनीतिक घमासान शुरू हो गया।
कौन हैं डॉ. नीरा चौधरी?
विपक्ष का आरोप है कि डॉ. नीरा को वरिष्ठता क्रम दरकिनार करते हुए पदोन्नति दी गई है, क्योंकि वह प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी हैं। वरिष्ठता सूची के आधार पर नीरा से पहले 1000 अन्य डॉक्टर दावेदार थे। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने 2017 में प्रथम श्रेणी डॉक्टरों की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की थी, जिसमें 1042 डॉक्टरों के नाम थे, लेकिन नीरा उनमें शामिल नहीं थीं।
डॉक्टर नाराज, अधिकारी चुप
बताया जा रहा है कि डॉ. नीरा की नई नियुक्ति से अन्य डॉक्टरों में काफी नाराजगी है। हालांकि, अधिकारी इस नियुक्ति को नियमानुसार बता रहे हैं। वहीं, इस मामले में जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधी से संपर्क साधा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि, डॉ. नीरा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिसे जो कहना है, कहता रहे। मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहती हूं।
34 अन्य जिलों में भी दरकिनार किए गए वरिष्ठ
जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के 52 जिलों में से 34 जिले ऐसे हैं, जहां पिछले एक साल में सीनियर-जूनियर वाली गड़बड़ हो चुकी है। दरअसल, इन सभी 34 जिलों में वरिष्ठ चिकित्सक की जगह कनिष्ठ चिकित्सक को सीएमएचओ बना दिया गया। इनमें शाजापुर में डॉ. राजू निदारिया, खरगोन में रजनी डाबर, बड़वानी में डॉ. अनिता सिंगारे, रतलाम में डॉ. प्रभाकर नानावरे को सीएमएचओ बना दिया गया।
कांग्रेस ने कसा तंज
स्वास्थ्य मंत्री की पत्नी डॉ. नीरा की नियुक्ति पर कांग्रेस ने भी निशाना साधा है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने इस मसले पर ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि अंधा बांटे रेवड़ी, फिर अपने-अपने को दे। बहुत से सीनियर डॉक्टर्स को बायपास करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी डॉ. नीरा चौधरी को संयुक्त संचालक बना दिया।