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Lok Sabha: चार चरण के मतदान में छिपा है भाजपा की सफलता का राज! इन सीटों पर कैसे मुकाबला करेगी कांग्रेस, जानें

सार

Lok Sabha Chunav: तीन महीने पहले विधानसभा चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन कर सत्ता में लौटी भाजपा के लिए यूं तो राह आसान लग रही है। हालांकि, हर चरण में एक-दो सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। पहले चरण में भाजपा के लिए छिंदवाड़ा सीट मुश्किल है। जानें हर सीट के समीकरण...।
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मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। पूरे देश में सात चरणों और मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर चार चरणों में मतदान होगा। नतीजे चार जून को आएंगे। खास बात यह है कि 2019 में भी मध्य प्रदेश में चार चरणों में मतदान हुआ था और भाजपा ने इसका रणनीतिक फायदा उठाते हुए 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे दिग्गज नेता को भी गुना में हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने सिर्फ छिंदवाड़ा के गढ़ को बचाने में कामयाबी हासिल की थी, जहां नकुलनाथ ने आसान जीत हासिल की थी।

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मध्य प्रदेश में पहले चरण में 19 अप्रैल को छह सीट, दूसरे चरण में 26 अप्रैल को सात सीट, तीसरे चरण में सात मई आठ सीट और चौथे चरण में 13 मई को आठ सीटों पर वोटिंग होगी। भाजपा ने चुनावों की तारीख घोषित होने से पहले सभी 29 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। वहीं, इस मामले में पिछड़ी कांग्रेस का आंकड़ा 10 उम्मीदवारों की लिस्ट पर ही अटका है। 
 
हर चरण में एक-दो सीटें मुश्किल
तीन महीने पहले विधानसभा चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन कर सत्ता में लौटी भाजपा के लिए यूं तो राह आसान लग रही है। हालांकि, हर चरण में एक-दो सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। पहले चरण में भाजपा के लिए छिंदवाड़ा सीट मुश्किल है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ इस सीट से मैदान में हैं। भाजपा भी इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए पिछले दो वर्षों से जोर लगा रही है। 
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दूसरे चरण में सतना लोकसभा सीट पर भी कांटे का मुकाबला हो सकता है। सांसद गणेश सिंह और कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा में मुकाबला है। गणेश सिंह तीन महीने पहले विधायकी का चुनाव कुशवाहा से हार चुके हैं।
 
तीसरे चरण में भिंड और मुरैना सीटों पर मुकाबला कड़ा है। भिंड से कद्दावर दलित चेहरा फूल सिंह बरैया कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। बरैया इस समय भांडेर से विधायक हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें हैं, जहां कांग्रेस और भाजपा ने चार-चार सीटें जीती हैं। 
 
राजगढ़ सीट भी भाजपा के लिए आसान नहीं रहने वाली। भाजपा ने रोडमल नागर पर फिर भरोसा जताया है। जबकि कांग्रेस प्रियव्रत सिंह को टिकट दे सकती हैं, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है।
 
रतलाम-झाबुआ, धार और खंडवा सीटों पर भी मुकाबला रोचक हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया हैं। भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लेकिन कांग्रेस को खंडवा और रतलाम-झाबुआ सीट पर उम्मीदवार घोषित करना है।
 
पहला चरणः वोटिंग 19 अप्रैल को
छह सीटें- सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा 
 
सीधी सीट भाजपा की मजबूत सीट है। भाजपा ने चेहरा बदला है। पूर्व सांसद रीति पाठक के विधायक बनने के बाद भाजपा ने डॉ. राजेश मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने कमलेश्वर पटेल को मौका दिया है। इस सीट पर ब्राह्मण और ठाकुरों का दबदबा है। आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।
 
विंध्य क्षेत्र की शहडोल लोकसभा सीट एसटी के लिए आरक्षित है। भाजपा ने सांसद हिमाद्री सिंह को फिर से टिकट दिया है। आदिवासी समाज से आने वाली हिमाद्री उच्च शिक्षित हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में आदिवासी समाज के मतदाताओं की बहुलता भी है। भाजपा यहां मजबूत स्थिति में है।
 
जबलपुर लोकसभा सीट पर भाजपा की स्थिति पहले के मुकाबले थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। पार्टी ने आशीष दुबे को टिकट दिया है। उनकी उम्मीदवारी पर पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। यह सीट राकेश सिंह की हुआ करती थी, जो अब प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। ये सीट ब्राह्मण-ओबीसी बहुल सीट है।
 
बालाघाट में भी भाजपा की स्थिति मजबूत है। भाजपा ने महिला और जमीनी कार्यकर्ता डॉ. भारती पारधी को प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया। मौजूदा सांसद ढाल सिंह बिसेन से जनता नाराज थी। इस सीट पर पंवार समाज (ओबीसी) चुनावी नतीजों को बदलने या पलटने की ताकत रखते हैं।
 
छिंदवाड़ा कमलनाथ का गढ़ है। भाजपा को यहां से लंबे अरसे से जीत की आस है। 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस को केवल इसी सीट पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा इस सीट पर जीत के लिए पिछले दो वर्षों से जमीन पर काम कर रही है। कांग्रेस से नकुलनाथ मैदान में हैं। जबकि भाजपा ने विवेक बंटी साहू को फिर प्रत्याशी बनाया है।
 
मंडला लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ कहा जाता है। लेकिन इस सीट पर रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। आदिवासियों के लिए सुरक्षित मंडला सीट से भाजपा ने फग्गन सिंह कुलस्ते को टिकट दिया है। कांग्रेस ने चार बार के विधायक ओमकार सिंह मरकाम को मैदान में उतारा है। आदिवासी मतदाता ही मंडला सीट पर हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं।
 
दूसरा चरणः  26 अप्रैल
सात सीटः टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद और बैतूल
 
विंध्य क्षेत्र की सतना सीट पर इस बार मुकाबला कांटे का नजर आ रहा है। भाजपा ने फिर सतना सांसद गणेश सिंह को टिकट दिया है। गणेश सिंह विधानसभा चुनाव में मतदाताओं का भरोसा नहीं जीत पाए थे। सिंह ओबीसी कुर्मी समाज से आते हैं। सतना लोकसभा और विंध्य क्षेत्र में कुर्मी पटेल और ब्राह्मण समुदाय निर्णायक है। गणेश सिंह का मुकाबला कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा से होगा। कुशवाहा ने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को हराया था।
 
विंध्य की सियासत का गढ़ रीवा को माना जाता है। इस सीट पर भाजपा की स्थिति मजबूत है। ब्राह्मण और ओबीसी वर्ग निर्णायक है। पार्टी ने यहां से तीसरी बार जनार्दन मिश्र को मैदान में उतारा है।
 
यूपी की सीमा से सटे मप्र के बुंदेलखंड में खजुराहो सीट आती है। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। 2004 से इस सीट पर भाजपा का दबदबा है। भाजपा की तरफ से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा मैदान में हैं। जबकि कांग्रेस ने यह सीट गठबंधन सहयोगी सपा को दी है।
 
दमोह लोकसभा सीट लंबे अरसे से भाजपा का गढ़ बन चुकी है। लोधी समुदाय यहां सबसे अधिक है। इसलिए भाजपा ने राहुल सिंह लोधी के तौर पर समाज को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। लोकसभा क्षेत्र में लोधी समाज के वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। दमोह, जबेरा, पथरिया, देवरी, बनडा और बड़ा मलहरा में लोधी समाज की संख्या अधिक है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।
 
बुंदेलखंड की टीकमगढ़ लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। इसके अलावा ओबीसी वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका है। लोधी और ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। भाजपा ने जहां अपने केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार पर लगातार चौथी बार भरोसा जताया है। वहीं, कांग्रेस ने नए चेहरे के तौर पर पंकज अहिरवार को मैदान में उतारा है।
 
होशंगाबाद लोकसभा सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। मध्य भारत अंचल में आने वाली इस लोकसभा सीट पर 1989 से 2004 तक बीजेपी ने लगातार चुनाव जीता था। 2009 में इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली। लेकिन 2014 में फिर भाजपा ने ये सीट कांग्रेस से छीन ली। ओबीसी बहुल सीट पर एससी-एसटी निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इस सीट से दर्शन सिंह चौधरी को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है।
 
भाजपा का गढ़ बैतूल लोकसभा सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। इस सीट पर एससी और एसटी वर्ग के मतदाता ही निर्णायक भूमिका में नजर आते हैं। भाजपा ने दुर्गादास उइके को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने पिछला चुनाव हार चुके आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम को दोबारा प्रत्याशी बनाया है।
 
तीसरा चरणः 7 मई
आठ सीटें- मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल और राजगढ़
 
चंबल क्षेत्र में आने वाली मुरैना लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रही है। इस सीट पर मुख्य रूप से ठाकुर और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच ही लड़ाई होती है। जातिवाद के कारण ही इस सीट का रुझान अक्सर विपरीत दिशा में जाता है। सवर्ण वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भाजपा ने इस बार इस सीट भाजपा ने शिवमंगल सिंह तोमर को टिकट दिया है।
 
भिंड-दतिया लोकसभा सीट पर पिछले 35 सालों से बीजेपी का कब्जा है। लेकिन इस बार इस सीट पर कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है। भाजपा ने यहां से संध्या राय को टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने यहां से कद्दावर दलित चेहरे फूल सिंह बरैया को मैदान में उतारा है। बरैया वर्तमान में भिंड दतिया लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली भांडेर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। भिंड दतिया लोकसभा सीट के अंतर्गत आठ विधानसभा सीटें हैं। इन आठ विधानसभा सीटों में से चार कांग्रेस और चार बीजेपी के पास हैं।
 
ग्वालियर लोकसभा सीट सिंधिया राजघराने के वर्चस्व वाली सीट रही है। इस सीट पर कोई जातीय समीकरण काम नहीं करता है। इस बार के चुनाव में भाजपा ने पूर्व विधायक भारत सिंह कुशवाह को टिकट दिया है। फिलहाल कांग्रेस ने टिकट घोषित नहीं किया है। इस सीट पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के निर्णायक भूमिका में हैं।
 
गुना लोकसभा सीट को सिंधिया राजघराने का गढ़ माना जाता है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस के टिकट पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वे भाजपा के टिकट के मैदान में हैं।
 
सागर बुंदेलखंड की एक प्रमुख लोकसभा सीट है। यह सीट भाजपा के गढ़ के रुप में मानी जाती है। भाजपा की ओर से लोकसभा प्रत्याशी डॉ. लता वानखेड़े को बनाया गया है। वहीं, कांग्रेस ने अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। क्षेत्र में ब्राह्मण, ओबीसी, अनुसूचित जाति वर्ग का प्रभावी वोट बैंक है।
 
विदिशा लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ कही जाती है। इस बार इस सीट से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैदान में हैं। शिवराज इस क्षेत्र में लोकप्रिय हैं। इससे पहले भी इस सीट से कई बार सांसद रह चुके हैं।
 
भोपाल लोकसभा सीट भाजपा के वर्चस्व वाली सीट है। यहां से भाजपा ने विधानसभा चुनाव हारे आलोक शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर ब्राह्मण और कायस्थ मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है।
 
राजगढ़ लोकसभा सीट एमपी की वीआईपी सीटों में से एक है। यहां से कांग्रेस नेता कभी दिग्विजय सिंह और फिर उनके भाई लक्ष्मण सिंह यहां से सांसद रह चुके हैं। इस सीट पर भाजपा के रोडमल नागर दो बार से सांसदी का चुनाव जीत रहे हैं। इस सीट पर ओबीसी, एससी निर्णायक भूमिका में हैं। कांग्रेस ने इस सीट से प्रियव्रत सिंह को टिकट दे सकती है। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला रोचक हो जाएगा।
 
चौथा चरण- 13 मई
आठ सीटें- देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन और खंडवा 
देवास-शाजापुर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ कहा जाता है। यह सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां से भाजपा ने सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी को फिर टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने राजेंद्र मालवीय को मैदान में उतरा है।
 
उज्जैन लोकसभा सीट पर भी लंबे अरसे से भाजपा का कब्जा है। यह सीट प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव गृह क्षेत्र है। यह सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। पार्टी ने फिर से यहां से अनिल फिरोजिया पर भरोसा जताया है।
 
मंदसौर लोकसभा सीट भाजपा के वर्चस्व वाली सीट रही है। लेकिन 2009 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो गया। 2014 के बाद इस सीट पर भाजपा के सुधीर गुप्ता चुनाव जीत रहे हैं। इस बार भी पार्टी ने उन पर ही भरोसा जताया है। इस सीट पर एससी और एसटी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।
 
धार-महू लोकसभा सीट-एसटी के लिए आरक्षित है। इस सीट से भाजपा ने पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर को फिर मैदान में उतारा है। इस सीट पर आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में रहते हैं। इसके अलावा पाटीदार, ब्राह्मण, राजपूत और मुस्लिम वोटों का भी प्रभाव है। कांग्रेस ने यहां से राधेश्याम मुवेल को उम्मीदवार बनाया है। इससे मुकाबला रोचक हो गया है।
 
इंदौर लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ कही जाती है। चार दशक से कांग्रेस को इस सीट पर हार का मुंह देखना पड़ रहा है। भाजपा ने इस सीट पर फिर शंकर लालवानी को मैदान में उतारा है।
 
निमाड़ क्षेत्र की खरगोन-बड़वानी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। बीजेपी ने गजेंद्र पटेल पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने यहां से सेल टैक्स विभाग से वीआरएस लेकर सक्रिय राजनीति में आए 42 वर्षीय युवा पोरलाल खरते को उम्मीदवार बनाया है। यहां आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।
 
खंडवा लोकसभा सीट इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। इस सीट पर भाजपा ने फिर से ज्ञानेश्वर पाटिल को मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस की तरफ से पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता अरुण यादव के इस सीट पर लड़ने की चर्चा है। इस सीट पर एससी और एसटी वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।
 
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा है। भाजपा ने पिछले दो लोकसभा चुनावों से इस सीट पर जीत हासिल कर रही है। अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित, इस सीट में मुख्य रूप से लगभग भील, भिलाला जाति के लोग निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। भाजपा ने इस सीट से अनीता नागर सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है।

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