पुराने शिक्षकों को टीईटी से छूट
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मध्यप्रदेश में पुराने शिक्षाकर्मियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट मिलने की मांग के बीच हाईकोर्ट के एक आदेश से मामले में आगे की कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। जबलपुर हाईकोर्ट ने अनिल कुमार तोमर एवं अन्य की याचिका पर शासन को याचिकाकर्ताओं के लंबित अभ्यावेदन का 60 दिनों के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित शिक्षाकर्मियों की निगाहें शासन के फैसले पर हैं। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह मामला याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी-42009-2026 से संबंधित है। 12 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में शासन के सक्षम प्राधिकारी को अभ्यावेदन पर स्पष्ट और कारण सहित निर्णय लेने के लिए कहा गया है।
1997 से 1999 के बीच हुई थी नियुक्तियां
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पक्ष रखते हुए बताया कि संबंधित शिक्षाकर्मी वर्ग-दो और वर्ग-तीन के पदों पर वर्ष 1997 से 1999 के बीच नियुक्त हुए थे। उनकी नियुक्तियां 3 सितंबर 2001 से पहले की हैं। वर्तमान में पदोन्नति की प्रक्रिया में टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता का मुद्दा सामने आने के बाद उन्होंने शासन से इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में विभिन्न न्यायिक निर्णयों का हवाला भी दिया है। इनमें सर्वोच्च न्यायालय के अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट मामले और रामदास समराव सोलास्कर बनाम महाराष्ट्र राज्य प्रकरण का उल्लेख किया गया है। उनका तर्क है कि नियुक्ति की तारीख और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर उनके मामले पर विचार किया जाना चाहिए।
60 दिन में फैसले का निर्देश, लेकिन छूट अभी नहीं
हाईकोर्ट के निर्देश का अर्थ यह है कि शासन को निर्धारित अवधि में अभ्यावेदन पर विचार कर कारण सहित निर्णय लेना होगा। हालांकि, इस आदेश से शिक्षाकर्मियों को टीईटी से स्वतः छूट नहीं मिली है। छूट मिलेगी या नहीं, यह शासन के निर्णय और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
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अन्य शिक्षकों के लिए भी अहम हो सकता है फैसला
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार, पुराने शिक्षाकर्मियों की टीईटी संबंधी समस्या और पदोन्नति के मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय की जरूरत है। संगठन ने शासन से न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समयसीमा में कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पुराने शिक्षाकर्मियों के सेवा हितों पर लागू नियमों और न्यायिक निर्णयों के अनुरूप समाधान निकाला जाना चाहिए। इस मामले का प्रभाव समान परिस्थितियों वाले अन्य शिक्षकों पर भी पड़ सकता है, लेकिन प्रदेश के करीब 60 हजार शिक्षकों को सीधे लाभ मिलने की बात की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। फिलहाल, मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम शासन का निर्णय होगा।