मध्यप्रदेश में बिजली कटौती, खाद के लिए परेशानी, मंडियों की अव्यवस्था और बारिश की मार से जूझ रहे किसानों के मुद्दे पर भारतीय किसान संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने सरकार को दशहरे तक का समय देते हुए चेतावनी दी है कि किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो प्रदेशभर में बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने आरोप लगाया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाएं पटरी से उतर रही हैं, लेकिन सरकार समस्याओं का समय पर समाधान नहीं कर रही है।भारतीय किसान संघ ने बिजली, खाद, बीज, सिंचाई के लिए पानी, समर्थन मूल्य पर खरीदी और फसल बीमा को प्रमुख मांगों में शामिल किया है। आंजना के मुताबिक, संघ ने सरकार को 15 दिन के भीतर समस्याओं पर कार्रवाई करने का समय दिया है। उनका कहना है कि किसानों की मांगों पर ठोस कदम उठाने के बजाय केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत नहीं होने के कारण संघ को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ रहा है।
मोटरें चालू होते ही बिजली संकट, 12 घंटे आपूर्ति की मांग
किसान संघ ने बिजली कटौती को लेकर सरकार को घेरा। कमल सिंह ने कहा कि पिछले करीब 10 दिनों में सिंचाई के लिए बिजली की समस्या ज्यादा बढ़ी है। किसानों ने खेतों में मोटरें चालू कीं तो बिजली की उपलब्धता का संकट सामने आने लगा। उनका सवाल है कि जब खेती का सीजन आने वाला था, तब सरकार ने बिजली की पर्याप्त व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की? संघ ने सिंचाई के लिए प्रतिदिन 12 घंटे बिजली देने की मांग की है। आंजना ने आरोप लगाया कि केवल खेतों की बिजली ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में घरों की आपूर्ति भी मेंटेनेंस के नाम पर काटी जा रही है। रात में सोने के समय बिजली गुल होने से आम लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी बताकर किसानों की जरूरतों को नजरअंदाज करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भावांतर से नहीं चलेगा काम, समर्थन मूल्य पर खरीदी करे सरकार
भावांतर योजना को लेकर भी किसान संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के लिए समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था होनी चाहिए। केवल भावांतर योजना के भरोसे किसानों को राहत नहीं दी जा सकती। कमल सिंह ने धान की फसल को लेकर भी सवाल किया कि सरकार भावांतर के जरिए किसानों को किस तरह राहत देगी। संघ ने मंडियों में अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई जगह मंडियों का संचालन प्रभावित है। इससे किसानों को उपज बेचने में परेशानी हो रही है। संघ की मांग है कि सरकार खरीदी व्यवस्था को स्पष्ट करे और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी इंतजाम करे।
ई-टोकन और पोर्टल में उलझे किसान, खाद के लिए भटकने का आरोप
खाद वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कमल सिंह ने कहा कि ई-टोकन प्रणाली और सरकारी पोर्टल किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। पंजीयन में दिक्कतों के चलते किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। संघ ने मांग की कि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ वितरण व्यवस्था को सरल बनाया जाए। किसान संघ ने बीज की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। कमल सिंह के मुताबिक, कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलों के लिए उपयुक्त बीजों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कृषि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में अनाज की कीमतें बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सरकार को अभी से तैयारी करनी चाहिए, न कि बाद में मूल्य वृद्धि की जिम्मेदारी से बचना चाहिए।
कहीं अतिवृष्टि से फसल बर्बाद, कहीं बोवनी तक नहीं
प्रदेश में बारिश की असमान स्थिति ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान संघ के मुताबिक, कुछ जिलों में अत्यधिक बारिश से मूंग, उड़द, मक्का और मूंगफली की फसलों को नुकसान हुआ है, जबकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में बोवनी और खेती प्रभावित हुई है। संघ ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कर तत्काल राहत और मुआवजा देने की मांग की है। वहीं, कम बारिश वाले इलाकों के लिए सरकार से अलग कार्ययोजना बनाने को कहा है। आंजना का कहना है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, सिंचाई के साधन और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की व्यवस्था पर सरकार को पहले से काम करना चाहिए।
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मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता
किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने मंत्रियों से मुख्यमंत्री के साथ बैठकर इन मुद्दों पर चर्चा करने और समाधान निकालने की मांग की। संघ का कहना है कि बिजली, खाद, बीज, पानी, फसल बीमा और उपज की खरीदी जैसे मुद्दों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। अब सरकार के सामने दशहरे तक किसानों की मांगों पर कार्रवाई करने की चुनौती है। किसान संघ ने साफ कर दिया है कि समयसीमा के बाद अगला कदम आंदोलन होगा