मध्य प्रदेश सरकार अब बड़े शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष पहल करने जा रही है। इसके तहत "मुख्यमंत्री नगर वन विकास योजना" की शुरुआत होगी, जिसके जरिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत अन्य शहरों में शहरी जंगल तैयार किए जाएंगे। इस योजना के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। नई योजना के अनुसार, अगले पांच वर्षों (2025-26 से 2029-30) में शहरों की शासकीय और वन भूमि पर हरियाली विकसित की जाएगी। इन वनों की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों को दी जाएगी। खास बात यह है कि पौधरोपण और रखरखाव की गुणवत्ता पर राशि निर्भर होगी। केवल तभी किस्तें जारी होंगी जब 70% पौधे जीवित पाए जाएंगे।
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क्यों जरूरी है योजना?
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आबादी ने पर्यावरणीय संतुलन पर दबाव बढ़ा दिया है। 2011 से 2025 के बीच शहरों की जनसंख्या में करीब 60 लाख की वृद्धि हुई है। आने वाले दो दशकों में यह संख्या और बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसी वजह से नगरीय निकाय क्षेत्रों में हरित आच्छादन को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2020 से "नगर वन योजना" के तहत 65 नगरीय निकायों में 1911 हेक्टेयर क्षेत्र पर वृक्षारोपण किया गया है। इसके साथ ही अमृत योजना के अंतर्गत 385 शहरों में सड़कों, नालों और शासकीय भूमि पर पौधे लगाए गए हैं।
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तीन साल में मिलेगा फंड
राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना के संचालन के लिए "ग्रीन कैडर" भी तैयार करेगी। नगरीय निकायों में खाली पदों पर भर्ती होगी। इनके जिम्मे न केवल शहरी जंगल विकसित करना होगा बल्कि पार्क, पगडंडी, साइकिल ट्रैक और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराना होगा। नगरीय निकायों को कुल 500 करोड़ रुपये तीन किस्तों में दिए जाएंगे। पहले साल 60%, दूसरे और तीसरे साल 20-20% राशि मिलेगी। यह भुगतान तभी होगा जब योजना के अनुसार हरे-भरे वन विकसित हो जाएंगे।
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शहरों को हरित रूप देंगे
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निकायों ने इस वर्ष पौधरोपण में उल्लेखनीय काम किया है। अब बड़े स्तर पर ‘नगर वन’ का कॉन्सेप्ट लागू करके शहरों को हरित स्वरूप देने की तैयारी है।