विपिन जैन ने कहा कि सरकार एमएसएमई उद्यमियों की बेसिक समस्या खत्म कर दें तो समिट करने की जरूरत ही नहीं होगी। निवेश अपने आप प्रदेश में आएगा। हमारे पड़ोसी राज्यों में मंडी टैक्स 0.2 पैसे से 0.50 पैसा लगता है। मध्य प्रदेश में यह 1.70 रुपए लिया जा रहा है। इसमें भी 20 पैसे रिफ्यूजी टैक्स लिया जाता है। वह भी तब जबकि अब कोई रिफ्यूजी नहीं है।
मध्य प्रदेश में सरकार 11 और 12 जनवरी को ग्लोबल इवेस्टर्स समिट (जीआईएस)- 2023 का आयोजन कर रही है। इसमें बड़े बड़े उद्योगपतियों को बुलाया जा रहा है। इसमें 400 से ज्यादा उद्योगपति हिस्सा लेंगे। 65 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उम्मीद है कि प्रदेश में समिट से 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आएगा। इस समिट की तैयारी की समीक्षा खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं। इस बीच ग्लोबल इवेस्टर्स समिट पर सरकार के बड़े उद्यमियों को आमंत्रित करने पर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के उद्यमियों का कहना है कि सरकार उनकी बेसिक समस्या खत्म कर दें तो समिट करने की जरूरत ही नहीं होगी। अमर उजाला ने प्रदेश के उद्यमियों और उनके संगठनों के पदाधिकारियों से बात कि। जाने क्या बोले उद्यमी।
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25 साल से डबल टैक्सेसन चल रहा
फेडरेशन ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष सीवी मालपानी ने कहा कि सरकार को बड़े उद्योगों को बुलाने के साथ ही एमएसएमई की समस्याओं का निराकरण करने की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मण्डीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में नगर पालिका प्रापर्टी टैक्स ले रही है। एकेवीएन मेंटनेंस चार्ज ले रहा है। यह डबल टैक्सेसन 25 साल से चल रहा है। इसके समाधान की लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा। सरकारी जमीन पर प्रापर्टी टैक्स नहीं लेने को लेकर दो साल से कार्रवाई चल रही है, लेकिन अब तक निर्णय नहीं हो पाया। एग्जिट पॉलिसी की समस्याएं से भी कई लोग परेशान है।
अब रिफ्यूजी नहीं फिर भी रिफ्यूजी टैक्स
मध्य प्रदेश लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष विपिन जैन ने कहा कि सरकार एमएसएमई उद्यमियों की बेसिक समस्या खत्म कर दें तो समिट करने की जरूरत ही नहीं होगी। निवेश अपने आप प्रदेश में आएगा। हमारे पड़ोसी राज्यों में मंडी टैक्स 0.2 पैसे से 0.50 पैसा लगता है। मध्य प्रदेश में यह 1.70 रुपए लिया जा रहा है। इसमें भी 20 पैसे रिफ्यूजी टैक्स लिया जाता है। वह भी तब जबकि अब कोई रिफ्यूजी नहीं है। यह टैक्स बाग्लादेश से भारत में रिफ्यूजी के आने पर लगाया गया था। एमएसएमई इंडस्ट्री के लिए बिजली की दरें पूरे देश में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा है। यह स्थिति तब है जबकि मध्य प्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य हैं। केरल में सबसे ज्यादा है।
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एमएसएमई को कहने को ही बढ़ावा
गोविंदपुरा इंडस्ट्री एसोसिएशन के सचिव विजय गौर ने कहा कि समिट पहले भी हुई है, लेकिन निवेश आता दिखा नहीं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को प्रदेश में कहने को तो बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन नीतियों के क्रियान्वयन की लचर प्रक्रिया से एमएसएमई यूनिटें खत्म होती जा रही हैं। फैक्ट्री लाइसेंस में हर तीन साल में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही हैं। नगर निगम समेत अन्य एजेंसियों के लाइसेंस और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र से इंडस्ट्री चलाने की दिक्कतें बढ़ते जा रही हैं। सरकार की तरफ से पॉल्यूशन के लाइसेंस में अधिकारियों की तानाशाही को खत्म किया गया है। इसमें फीस भी घटाई गई गई है। सरकार को निवेश बढ़ाने के लिए इस तरह के निर्णय लेने होंगे।
बेसिक सुविधाओं की डिलेवरी ठीक करें
मण्डीदीप इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष और वर्तमान कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि सरकार को बड़े उद्योगों से पहले प्रदेश के छोटे उद्योगों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। सरकार की तरफ से जीएसटी और मशीनरी खरीदी पर सब्सिडी दी जाती है। लेकिन इसका पैसा मिलने में लेटलतीफी होती है। तीन से चार साल का समय लग जाता है। नवीनीकरण के समय पॉल्यूशन और फैक्ट्री लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में देरी होती है। इसके लिए भी परेशान होना पड़ता है। सरकार को सुविधा को बेहतर करने की तरफ भी कदम उठाना चाहिए।