रोमानिया के जालसाज आयोनेल मियु ने 2015 में भारत आकर मुंबई में एटीएम कार्डों की क्लोनिंग कर लाखों रुपये की ठगी की थी। 2017 में भी वह ठगी के एम मामले में मुंबई में गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद उसका पासपोर्ट जब्त हो गया। तब से वह अवैध रूप से भारत में रह रहा है।
मई और जून में भोपाल और इंदौर के बैंक ऑफ बड़ौदा के बैंक खाताधारकों के खाते से बिना ओटीपी मांगे, बिना लिंक शेयर किए लाखों रुपये निकाले जाने के मामले का भोपाल पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में रोमानिया के रहने वाले एक अंतरराष्ट्रीय जालसाज और मुंबई निवासी एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। रोमानिया के जालसाज आयोनेल मियु ने 2015 में भारत आकर मुंबई में एटीएम कार्डों की क्लोनिंग कर लाखों रुपये की ठगी की थी। 2017 में भी वह ठगी के एम मामले में मुंबई में गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद उसका पासपोर्ट जब्त हो गया। तब से वह अवैध रूप से भारत में रह रहा है।
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जालसाज ने भोपाल के बैंक ऑफ बड़ौदा के तीन एटीएम मशीनों में स्किमिंग मशीन और एटीएम मशीन की स्क्रीन में छोटा कैमरा लगाकर उसे इस तरह सर्किट से जोड़ा था कि किसी को पता नहीं चलता था। वह स्किमिंग से एटीएम कार्ड की जानकारी लेता और एटीएम मशीन की स्क्रीन पर लगाए गए हाई रिजोल्यूशन के कैमरे से एटीएम कार्ड का पासवर्ड पता कर गिफ्ट वाउचर के रूप में मिलने वाले कार्ड में मशीन के जरिए यही डाटा डालकर उसे एटीएम कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर खाताखारकों के बैंक खाते से पैसे निकाल लेता था।
दिल्ली में निकाले थे लाखों रुपये
जालसाजों ने भोपाल में इस तरह से बैंक ऑफ बड़ौदा के 75 खाता धारकों के एटीएम की स्किमिंग कर दिल्ली के नौ एटीएम बूथों से करीब 16-17 लाख रुपये निकाले हैं। जालसाज लगातार रोमानिया के कई लोगों से संपर्क में है। उसने एटीएम कार्ड बनाने की विधि ऑनलाइन सीखी। वह पहले रोमानिया और यूरोपीय देशों में सक्रिय साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह के साथ काम कर रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
दिल्ली से गिरफ्तार किया गया
आशंका है कि कहीं वह अभी भी रोमानिया या यूरोपियन देशों के जालसाजों के साथ मिलकर तो काम नहीं कर रहा है। भोपाल में बैंक ऑफ बड़ौदा के जिन 75 खाता धारकों के खाते से 16-17 लाख रुपये निकाले गए हैं, उस मामले में रोमानिया निवासी आयोनेल मियु और मुंबई निवासी फिरोज अहमद को भोपाल क्राइम ब्रांच ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। दोनों को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया है। दोनों स्वयं को 12वीं पास बताते हैं। रोमानियन जालसाज ठीक से अंग्रेजी भी नहीं बोल पाता, वह सिर्फ अपने देश की भाषा फर्राटे से बोलता है, जिस कारण भी पुलिस को पूछताछ में समस्या हुई।
एटीएम क्लोनिंग मशीन लगाई
मुंबई निवासी फिरोज अहमद खान ने अपने पहचान पत्र से भोपाल में ऑनलाइन एक मकान मेंडोरा क्षेत्र में किराए से लिया। जिसमें दोनों जालसाज करीब एक माह तक ठहरे थे। भोपाल में रैकी कर बैंक ऑफ बड़ौदा के पुराने तकनीक वाले तीन एटीएम बूथों को चिह्नित कर उनमें एटीएम क्लोनिंग मशीन लगाई और मशीन के ऊपर हाई रिजोल्यूशन के कैमरे लगाए। एटीएम में सुबह ऑटो से जाते और क्लोनिंग मशीन और कैमरे लगाकर चले आते थे। शाम को जाकर उपकरण निकाल लाते थे।
बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम क्यों चुने
भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा ने बताया कि मास्टर माइंड आयोनेल मियु मूल रूप से नाईजीरिया का रहने वाला है। वह रोमानिया और यूरोपियन जालसाजों के गिरोह में रहकर काम कर चुका है। वह विदेश से क्लोनिंग मशीन और हिडन कैमरे लेकर आया था। उक्त क्लोनिंग मशीन पुरानी तकनीक की है, जो मैग्नेटिक एटीएम कार्ड का डाटा ही कैप्चर कर सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा की कुछ पुरानी एटीएम मशीनें हैं। जालसाज के पास जो मशीनें हैं, वह पुरानी डिजाइन के एटीएम मशीनों में ही लग सकती हैं, इस कारण वह बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम मशीनों को चुना था।
सिर्फ बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों से ही ठगी क्यों
जिन एटीएम मशीनों में क्लोनिंग मशीनें लगाई गई थीं, उनसे बैंक ऑफ बड़ौदा के अलावा अन्य बैंक के एटीएम कार्ड से भी राशि निकाली गई, लेकिन ठगी सिर्फ उक्त बैंक के ग्राहकों से ही क्यों हुई। इस पर पुलिस आयुक्त मिश्रा ने बताया कि चूंकि बड़ौदा बैंक में अभी भी मैग्नेटिक चिप वाले एटीएम कार्ड ही चल रहे हैं, जबकि अधिकांश बैंकों के एटीएम कार्ड अब चिप वाले हो गए हैं। जालसाज की क्लोनिंग मशीन सिर्फ मेग्नेटिक वाले एटीएम कार्ड का डाटा ही कैप्चर कर पाती है, इस कारण एक ही बैंक के ग्राहक जालसाजी का शिकार हुए हैं।
atm card
- फोटो : istock
कैसे बनाता था एटीएम कार्ड
डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रुतिकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि जालसाज गिफ्ट वाउचर वाले कार्ड को एमएसआर मशीन से एटीएम के रूप में बनाता था। स्किमिंग डिवाइसेस से एटीएम कार्ड की जानकारी लेता था। उसी समय ग्राहक द्वारा डाले गए पिन नंबर की जानकारी वह मशीन की स्क्रीन के ऊपर लगाए गए हाई रिजोल्यूशन कैमरे से निकाल लेता था। दोनों के डाटा को मैच करने के बाद वह एसएमआर मशीन से उक्त डाटा को गिफ्ट वाउचर के कार्ड में डालता था, जिसके बाद एटीएम कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर राशि निकालता था।
फिरोज अहमद का कार्य
फिरोज का कार्य एटीएम बूथों में डिवाइस लगाने, उन्हें निकालने और पैसे निकालने, मकान बुक करने, कार व ऑटो बुक करने, बाजार से सामान लाने का कार्य सौंपा गया था। आयोनेल मियु अपने पास फोन नहीं रखता, वह सिर्फ फिरोज से बात करता है, बाकी किसी से संपर्क नहीं रखता, ताकि वह कौन है और क्या करता है किसी को पता न चके।
आयोनेल मियु यह काम करता था
आयोनेल रैकी कर टारगेट तय करता था। क्लोनिंग से प्राप्त डाटा को मशीन और लैपटॉप के जरिए मिलान करना और उससे मशीन के जरिए नया एटीएम कार्ड बनाने का कार्य करता था। कई बार वह एटीएम बूथ में जाकर पैसे निकालने का कार्य भी स्वयं करता था।
जालसाजों से बरामद किए गए उपकरण
डीसीपी सोमवंशी ने बताया कि दोनों जालसाजों के पास से दो मोबाइल, एटीएम कार्ड बनाने वाली एक एमएसआर मशीन, एक डिजिटल मल्टीमीटर, एक एटीएम स्कीमर मशीन, एक वीडियो डिवाइस रिकॉर्डिंग मशीन, सात एटीएम कार्ड की साइज के लोहे की पत्ती, एक एटीएम मशीन का मॉड्यूल, एक लैपटॉप, 3 सिमकार्ड, 4 एटीएम कार्ड, एक पासपोर्ट भी जब्त किया गया है।
इंदौर के बाद जयपुर था निशाने पर
पुलिस आयुक्त मिश्रा ने बताया कि इंदौर के साथ कई शहरों में जालसाज ने क्लोनिंग कर राशि निकालने की जानकारी दी है। इंदौर पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। जिन नए शहरों की जानकारी जालसाज ने दी है, संबंधित जिले के एसपी को जानकारी शेयर की जा रही है। भोपाल पुलिस की टीम जब जालसाज को गिरफ्तार करने दिल्ली पहुंची तो वह अपने साथी फिरोज के साथ जयपुर में ठगी करने के लिए ही जाने वाला था। जयपुर में रैकी भी रक चुके थे।
रोमानिया के लोगों से संपर्क, मिलने आया था परिवार
डीसीपी क्राइम श्रुतिकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि 2015 में रोमानिया से भारत आकर वह दिल्ली में रुका, 2015 में ठाणे के पैठ बाजार थाना क्षेत्र में इसी तरह की धोखाधड़ी की और गिरफ्तार हो गया। इसके बाद उसने 2017 में मुंबई में धोखाधड़ी की और पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उसका पासपोर्ट जब्त हो जाने के कारण वह अब अवैध रूप से भारत में रह रहा है। फिलहाल वह दोनों मामलों में जमानत पर है। 2018 में उसका परिवार भारत मिलने आया था। वह नाईजीरिया के कई लोगों से लगातार फोन से संपर्क में रहता है।
रोज 50 हजार की कोकीन का सेवन
पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि मुख्य जालसाज रोमानिया निवासी आयोनेल मियु ड्रग्स का आदी है। वह प्रतिदिन 40 से 50 हजार रुपये की कोकीन या अन्य सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन करता है। डीसीपी ने बताया कि हैवी ड्रग एडिक्ट होने के कारण भोपाल में जब रहने आया तो करीब एक माह के उपयोग के लिए अपने साथ दिल्ली से ही बड़ी मात्रा में कोकीन लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना पासपोर्ट वीजा का एक अंतर्राष्ट्रीय जालसाज भोपाल में किराये के कमरे में एक महीने रहा, लेकिन भोपाल पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
पुलिस से बचने की तरकीब
आयोनेल मियु का पासपोर्ट जब्त होने के कारण भोपाल में फिरोज अहमद ने अपने दस्तावेज से मकान किराए पर लिया था। कोरोनाकाल के बाद 2021 में मियु ने मुंबई में फिरोज के अपार्टमेंट में किराए से कमरा लिया, यहीं से संपर्क हुआ और अपने गिरोह में शामिल कर लिया। एक से डेढ़ लाख रुपये महीना कमाने की लालच में फिरोज गिरोह में शामिल हुआ।