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भोपाल: ऑनलाइन रिफंड के नाम पर साइबर ठगों का नया पैंतरा, फर्जी कस्टमर केयर नंबर से खाली कर रहे खाते

Tue, 13 Oct 2026 10:17 AM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग और रिफंड के नाम पर साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। भोपाल में ऐसी 10 से ज्यादा शिकायतें मिलने की जानकारी है। ठग फर्जी कस्टमर केयर नंबर, लिंक और संदिग्ध ऐप के जरिए ग्राहकों के खातों में सेंध लगा रहे हैं।
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साइबर ठगों का नया जाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्योहारों पर ऑनलाइन शॉपिंग में मिल रहे आकर्षक ऑफर के बीच साइबर ठगों ने ठगी का नया जाल बिछा दिया है। अब ठग सिर्फ खरीदारी के दौरान ही नहीं, सामान लौटाने और रिफंड लेने के समय भी ग्राहकों को निशाना बना रहे हैं। रिफंड के इंतजार में ग्राहक जैसे ही मदद के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर तलाशता है, ठग उसे अपने जाल में फंसाने की कोशिश शुरू कर देते हैं। कोई नामी कंपनी से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाता है तो कोई कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर फोन करता है। इसके बाद रिफंड दिलाने के बहाने लिंक भेजकर, ओटीपी पूछकर या मोबाइल में संदिग्ध फाइल डाउनलोड कराकर बैंक खाते तक पहुंच बना ली जाती है। भोपाल में ऑनलाइन खरीदारी और रिफंड के नाम पर ठगी से जुड़ी 10 से ज्यादा शिकायतें सामने आने की जानकारी मिली है।
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रिफंड दिलाने के नाम पर खाते पर वार
साइबर ठगों का तरीका ऐसा होता है कि ग्राहक को शुरुआत में धोखाधड़ी का शक तक नहीं होता। ठग खुद को संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं। वे ग्राहक को बताते हैं कि उसका रिफंड अटक गया है या रकम वापस पाने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद मोबाइल पर लिंक भेजकर उस पर क्लिक करने को कहा जाता है। कई मामलों में बैंक खाते, कार्ड या यूपीआई से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।

कुछ ठग ग्राहकों को एपीके फाइल डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयरिंग एप चालू करने के लिए भी कहते हैं। ग्राहक के ऐसा करते ही उसके मोबाइल की जानकारी और बैंकिंग गतिविधियों तक अनधिकृत पहुंच का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह रिफंड पाने की उम्मीद में की गई छोटी-सी लापरवाही बड़ी आर्थिक चपत में बदल सकती है।
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गूगल पर दिखने वाला हर कस्टमर केयर नंबर सही नहीं
ठगी का एक तरीका फर्जी वेबसाइट और गलत कस्टमर केयर नंबर के जरिए भी अपनाया जा रहा है। ठग नामी कंपनियों से मिलते-जुलते नाम वाली वेबसाइट बनाकर उस पर अपने संपर्क नंबर डाल देते हैं। ग्राहक जब रिटर्न, रिफंड या ऑर्डर से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए इंटरनेट पर नंबर खोजता है तो वह अनजाने में ठगों के संपर्क में आ सकता है। इसके बाद ग्राहक को भरोसे में लेकर उससे गोपनीय जानकारी मांगी जाती है या किसी लिंक पर जाने के लिए कहा जाता है। इसलिए केवल वेबसाइट पर कंपनी का नाम, लोगो या आकर्षक डिजाइन देखकर उसे असली मान लेना भारी पड़ सकता है। कस्टमर केयर नंबर हमेशा संबंधित कंपनी के आधिकारिक एप या वेबसाइट से ही प्राप्त करना चाहिए।

सावधानी रखें नहीं तो खाली हो सकता है खाता
साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि ग्राहक रिफंड की प्रक्रिया को लेकर सतर्क रहें। किसी भी कंपनी का वास्तविक रिफंड पाने के लिए अनजान लिंक पर क्लिक करना या संदिग्ध एप डाउनलोड करना जरूरी नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति रिफंड के बदले पहले भुगतान करने, यूपीआई पिन डालने या ओटीपी बताने का दबाव बनाता है तो सतर्क हो जाएं।

पुलिस ने की सावधानी की अपील
  • ऑर्डर, रिटर्न और रिफंड से जुड़ी प्रक्रिया कंपनी के आधिकारिक एप या वेबसाइट से ही पूरी करें। 
  • इंटरनेट पर मिले किसी भी नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
  • बैंक, कार्ड या यूपीआई से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं।
  • मैसेज, ई-मेल या सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध लिंक को न खोलें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में फाइल इंस्टॉल न करें।
  • रिफंड दिलाने के नाम पर किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप चालू न करें।
  • रकम वापस दिलाने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क या अग्रिम भुगतान मांगने वालों से सावधान रहें।
ठगी हो जाए तो तुरंत उठाएं कदम
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एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ग्राहकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। रिफंड या रिटर्न की प्रक्रिया के नाम पर मांगी जा रही गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें और केवल आधिकारिक एप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें।
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