राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के मूल्यांकन की पुरानी व्यवस्था बदलने जा रही है। अब उत्तरपुस्तिकाएं मूल्यांकन केंद्रों तक पहुंचाकर कागज पर जांचने के बजाय स्कैन होकर कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंचेंगी। मूल्यांकनकर्ता इसी डिजिटल कॉपी पर अंक दर्ज करेगा और अंक सीधे विश्वविद्यालय के रिजल्ट सिस्टम में पहुंच जाएंगे। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है, जो किसी विषय में कम अंक आने के बाद रीवैल्यूएशन कराते हैं। अभी कई बार रीवैल्यूएशन का परिणाम आने में इतना समय लग जाता है कि इस बीच अगले सेमेस्टर की परीक्षा आ जाती है। नई व्यवस्था में रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया भी डिजिटल होने से परिणाम जल्दी जारी करने की कोशिश होगी।
12.5 हजार विद्यार्थियों पर हो रहा पहला प्रयोग
आरजीपीवी ने नई व्यवस्था को फिलहाल एमसीए के करीब 12,500 विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं पर आजमाना शुरू किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर व्यवस्था को दूसरे पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में भी लागू किया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होगी।
कॉपी से नाम हटेगा, पहचान बारकोड से होगी
नई व्यवस्था में उत्तरपुस्तिका को एक यूनिक बारकोड दिया जाएगा। कॉपी स्कैन होने के बाद उसे डिजिटल रूप में मूल्यांकनकर्ता को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मूल्यांकन के दौरान विद्यार्थी की पहचान गोपनीय रखी जा सकेगी। मूल्यांकनकर्ता स्क्रीन पर प्रश्नवार अंक दर्ज करेगा। अंक दर्ज होते ही उनका डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित डेटाबेस में चला जाएगा।
एक बार दर्ज अंक, आगे कई जगह इस्तेमाल
अभी परीक्षा के बाद अंकों को अलग-अलग स्तर पर दर्ज और मिलान करना पड़ता है। नई व्यवस्था में मूल्यांकन के दौरान दर्ज अंक सीधे डेटाबेस में सुरक्षित होंगे। इसके बाद वही डेटा रिजल्ट तैयार करने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी डेटा से टीआर शीट और डिजिटल मार्कशीट भी तैयार होगी। इससे अलग-अलग स्तर पर दोबारा अंक दर्ज करने की जरूरत कम होगी और मानवीय गलती की गुंजाइश भी घटेगी।
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रीवैल्यूएशन का काम भी उसी व्यवस्था में
नई प्रणाली में रिजल्ट जारी होने के बाद री-टोटलिंग और रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया भी इसी डिजिटल व्यवस्था से शुरू की जा सकेगी। संबंधित उत्तरपुस्तिका डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के कारण उसे दोबारा जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया आसान और तेज हो सकती है।
इसका सीधा असर उस विद्यार्थी पर पड़ेगा, जिसे बैक के साथ अगले सेमेस्टर की परीक्षा का सामना करना पड़ता है। उसे रीवैल्यूएशन के नतीजे के लिए लंबा इंतजार करने की स्थिति कम होने की उम्मीद है।
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रिजल्ट में देरी और अंक दर्ज करने की गलती पर लगाम
मैनुअल व्यवस्था में कॉपियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, मूल्यांकन, टोटलिंग और फिर अंकों को रिजल्ट सिस्टम में दर्ज करने में समय लगता है। इसी दौरान अंक जोड़ने या दर्ज करने में मानवीय त्रुटि की आशंका भी रहती है। डिजिटल मूल्यांकन में इन चरणों को कम किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इससे रिजल्ट जल्दी जारी होंगे, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और रीवैल्यूएशन में भी तेजी आएगी।