राजधानी भोपाल के करीब 25–35 किलोमीटर दूर जगदीशपुर (इस्लामनगर) के जंगल से सटे क्षेत्र में एक और मेफेड्रोन (एमडी ड्रग्स) फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। सोमवार को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने छापेमारी कर यहां से 61.2 किलो एमडी ड्रग्स (तरल रूप में) जब्त की है, जिसकी कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये आंकी गई है।
‘ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक’ के तहत कार्रवाई
डीआरआई को लंबे समय से यहां ड्रग्स बनने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद ‘ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक’ नाम से अभियान चलाया गया और भोपाल, मुंबई, सूरत और उत्तर प्रदेश में एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान गिरोह से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
542 किलो कच्चा माल जब्त
फैक्ट्री से 541.53 किलो से अधिक कच्चा माल भी जब्त किया गया है। इसमें मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलमाइन (एमएमए), हाइड्रोक्लोरिक एसिड और 2-ब्रोमो शामिल हैं। छापे के समय भोपाल से एक केमिस्ट और एक सहयोगी को मौके पर पकड़ा गया। डीआरआई की कार्रवाई के दौरान गिरफ्तारी का दायरा कई राज्यों तक फैला। एजेंसी ने एक आरोपी को उत्तर प्रदेश के बस्ती से पकड़ा, जबकि दूसरा आरोपी मुंबई के भिवंडी से गिरफ्तार हुआ। ड्रग्स बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले दो लोगों को भी मुंबई से दबोचा गया। वहीं भोपाल में केमिकल की डिलीवरी करने वाला व्यक्ति भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इसके साथ ही सूरत से हवाला नेटवर्क से जुड़े एक एजेंट को भी गिरफ्तार किया गया, जिससे इस पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचने में एजेंसी को बड़ी सफलता मिली।
इसके अलावा सूरत में हवाला नेटवर्क से जुड़े एक एजेंट को भी पकड़ा गया।
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हवाला से पहुंच रहा था पैसा
जांच में सामने आया कि फैक्ट्री के संचालन के लिए मुंबई और सूरत से हवाला के जरिए पैसा भेजा जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों ने माना कि वे एक विदेशी ड्रग्स तस्कर और उसके भारतीय नेटवर्क के निर्देश पर काम कर रहे थे। हैरानी की बात यह रही कि फैक्ट्री ईटखेड़ी थाने से महज दो किलोमीटर दूर संचालित हो रही थी। यहां करीब 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।
दस माह पहले भी हुआ था बड़ा खुलासा
अक्टूबर 2024 में भी भोपाल के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र से 907 किलो एमडी ड्रग्स बरामद हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 1814 करोड़ रुपये थी। उस समय एनसीबी और गुजरात एटीएस ने कार्रवाई कर कई आरोपियों को पकड़ा था।