राजधानी भोपाल में पानी की आपूर्ति और जलकर वसूली की व्यवस्था निजी एजेंसियों को सौंपने के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला फैसला बताते हुए भाजपा सरकार और नगर निगम को घेरा है। वहीं, महापौर मालती राय ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष इस व्यवस्था का ठीक से अध्ययन किए बिना सवाल उठा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था सभी कॉलोनियों में लागू नहीं होगी, बल्कि केवल बल्क जल कनेक्शन वाली उन कॉलोनियों में लागू की जाएगी, जहां रहवासी समितियां इसके लिए सहमत होंगी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरोलिया (माली) ने सवाल उठाया कि जब पानी नगर निगम का है और जल आपूर्ति का पूरा ढांचा जनता के टैक्स से तैयार हुआ है, तो फिर निजी एजेंसियों को बीच में लाकर अतिरिक्त कमाई का रास्ता क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने प्रकाशित समाचारों का हवाला देते हुए दावा किया कि नगर निगम निजी एजेंसियों को एक हजार लीटर पानी 17 रुपये की दर से उपलब्ध कराएगा, जबकि उपभोक्ताओं से 20 से 22 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। बरोलिया ने इस अंतर और प्रस्तावित व्यवस्था के आधार पर सवाल खड़े करते हुए निर्णय वापस लेने की मांग की।
महापौर बोलीं- समितियों की सहमति जरूरी
कांग्रेस के विरोध पर महापौर मालती राय ने कहा कि निजी एजेंसी से जलकर वसूली की व्यवस्था को लेकर विपक्ष को पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए। उनके मुताबिक, बल्क कनेक्शन वाली कॉलोनियों में रहवासी समितियों को जलकर वसूली में परेशानी आ रही थी। इसी वजह से समितियों की ओर से ऐसी व्यवस्था की मांग की जा रही थी। महापौर ने स्पष्ट किया कि निजी एजेंसी की भूमिका रहवासी समितियों की सहमति पर निर्भर करेगी। यदि कोई समिति इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं होती है, तो वहां इसे लागू नहीं किया जाएगा। ऐसे में यह व्यवस्था सभी कॉलोनियों पर अनिवार्य रूप से थोपने का फैसला नहीं है।
पानी की जिम्मेदारी निगम की, वसूली निजी हाथों में क्यों?
अभिनव बरोलिया ने कहा कि भोपाल की जनता पहले ही महंगाई, बिजली बिल और संपत्ति कर के बोझ से परेशान है। ऐसे में पानी जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी व्यवस्था में निजी एजेंसियों को शामिल करने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि पानी कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर नागरिक की जरूरत है। इसकी उपलब्धता और उचित शुल्क सुनिश्चित करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। उन्होंने निजी एजेंसियों को बकाया जलकर के नाम पर नल कनेक्शन काटने का अधिकार दिए जाने संबंधी खबरों पर भी चिंता जताई। कांग्रेस नेता ने नगर निगम से पूछा कि प्रस्तावित व्यवस्था में अतिरिक्त शुल्क का आधार क्या होगा, उपभोक्ताओं की शिकायतें कौन सुनेगा और निजी एजेंसियों की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी।
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अब इन सवालों पर निगम को देना होगा जवाब
एक तरफ कांग्रेस इस व्यवस्था को निजी एजेंसियों के लिए कमाई का रास्ता और जनता पर संभावित अतिरिक्त बोझ बता रही है, तो दूसरी तरफ महापौर इसे रहवासी समितियों की मांग और सहमति से जुड़ी व्यवस्था बता रही हैं। अब इस विवाद में सबसे अहम सवाल यही हैं कि निजी एजेंसियों के लिए शुल्क निर्धारण का आधार क्या होगा, उपभोक्ताओं से वसूली की शर्तें क्या रहेंगी और बकाया राशि के मामलों में नल कनेक्शन काटने की वास्तविक प्रक्रिया क्या होगी। बरोलिया ने भाजपा सरकार और नगर निगम से निर्णय की पुनर्समीक्षा कर निजी एजेंसियों को दिए जाने वाले अधिकारों और शर्तों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के हितों की अनदेखी हुई तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। वहीं, महापौर के बयान के बाद अब यह स्पष्ट करना भी जरूरी होगा कि सहमति देने वाली रहवासी समितियों और वहां रहने वाले उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।