मध्यप्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए भोपाल के कोलार में नौ दिनों का संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया है। भोपाल के कलेक्टर और डीआईजी ने इसकी जानकारी दी है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं की सुविधा जारी रहेगी। साथ ही भोपाल में कोचिंग संस्थानों को 15 दिनों तक बंद करने का निर्णय लिया गया है।
वहीं इससे पहले राज्य सरकार ने सभी शहरी इलाकों में शुक्रवार शाम 6 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में दो दिन तक सबकुछ बंद करने का फैसला किया गया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह कभी नहीं चाहते कि राज्य में पूर्ण बंदी लागू हो, लेकिन बेकाबू हालात के मद्देनजर सरकार ने यह फैसला लिया है। बता दें कि इससे पहले प्रदेश के कई जिलों में पूर्ण बंदी की गई है। छिंदवाड़ा, शाजापुर समेत अन्य जगहों पर लॉकडाउन लगाया गया है। छिंदवाड़ा में अगले 7 दिन तक पूर्ण लॉकडाउन लागू है।
प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी
बता दें कि प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 4043 नए मामले सामने आए हैं। प्रदेश के 4 बड़े शहरों में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज निकल रहे हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में 50 फीसदी संक्रमित मरीज पाए गए हैं। प्रदेश का इंदौर शहर सबसे ज्यादा संक्रमित है। यहां पर बड़ी संख्या में नए मरीज सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश के कई शहरों में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। सरकार ने भिलाई स्टील प्लांट से ऑक्सीन को लेकर समझौता किया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने अस्पतालों में एक लाख तक बेड की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है, इनमें से कुछ कोरोना देखभाल केंद्रों में होंगे - हर जिले में सरकार प्राइवेट सेक्टर से भी बिस्तर ले रही है, प्राइवेट अस्पतालों की ताकत को भी इस्तेमाल में लाया जाएगा। राज्य में ऑक्सीजन सप्लाई का कोई संकट नहीं है।
रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी पर बोले सीएम
शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को पूरा करने के लिए हमने रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने का फैसला किया है। हम इसे जहां भी जरूरत होगी, उपलब्ध कराएंगे। दवाओं की कमी न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।