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विवादों में घिरे बीयू को मिला नया कुलगुरु: प्रो. दीन दयाल बेदिया को मिली कमान, चार साल का कार्यकाल

Wed, 14 Oct 2026 06:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में दो कुलगुरुओं के इस्तीफे के बाद प्रो. दीन दयाल बेदिया को नया कुलगुरु नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल चार वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा। विश्वविद्यालय बीएड कॉलेजों की कथित अनियमितताओं, परीक्षा परिणामों में देरी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में रहा है। 
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प्रो. दीन दयाल बेदिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में लगातार नेतृत्व परिवर्तन और विवादों के बीच अब नए कुलगुरु की नियुक्ति कर दी गई है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रो. दीन दयाल बेदिया को विश्वविद्यालय का कुलगुरु नियुक्त किया है। वह उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पं. जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान में प्रोफेसर हैं। नियुक्ति आदेश के मुताबिक, उनका कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से चार वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा, इनमें जो पहले हो। विश्वविद्यालय में पिछले कुछ महीनों के दौरान कुलगुरु पद पर लगातार बदलाव हुए हैं। नाम बदलने के प्रस्ताव, परीक्षा परिणामों में देरी, प्रशासनिक कामकाज को लेकर छात्र संगठनों के विरोध और संबद्ध बीएड कॉलेजों में कथित अनियमितताओं की जांच ने संस्थान को चर्चा में रखा है। ऐसे में नए कुलगुरु के सामने शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाने की चुनौती होगी।
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दो कुलगुरुओं के इस्तीफे के बाद नई नियुक्ति
जून 2026 में तत्कालीन कुलगुरु प्रो. एसके जैन का इस्तीफा स्वीकार किया गया था। इसके बाद प्रो. विवेक शर्मा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। जुलाई में प्रो. विवेक शर्मा ने भी पद छोड़ दिया। उनके इस्तीफे के कारणों का राजभवन के आदेश में उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को नियमित नियुक्ति होने तक अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। 


बीएड कॉलेजों की जांच ने भी बढ़ाई मुश्किलें
विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड कॉलेजों में कथित अनियमितताओं का मामला भी सामने आया। रिपोर्टों में कुछ कॉलेजों के घोषित पते पर नहीं मिलने और आवश्यक सुविधाओं की कमी के आरोप लगाए गए। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जांच की पहल की। 18 जुलाई को मंत्रालय ने बताया कि मामले की पड़ताल के लिए तथ्य-जांच समिति गठित की गई है। शुरुआती सत्यापन में तीन कॉलेजों के अलावा एक अन्य कॉलेज भी उसी परिसर में संचालित मिलता पाया गया था। जांच का उद्देश्य कॉलेजों की वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों का मिलान करना है।
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अब नए कुलगुरु के सामने व्यवस्था सुधारने की चुनौती
विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों में देरी और प्रशासनिक कामकाज को लेकर छात्र संगठनों ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किए हैं। जून में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लंबित परिणामों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ आंदोलन कर कुलगुरु के इस्तीफे की मांग उठाई थी। ऐसे माहौल में प्रो. दीन दयाल बेदिया की नियुक्ति से विश्वविद्यालय को नियमित नेतृत्व मिला है। अब छात्रों के लंबित शैक्षणिक कार्य, परीक्षा परिणाम, संबद्ध कॉलेजों की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर नए कुलगुरु के कदम महत्वपूर्ण होंगे। नियुक्ति पर एक शर्त भी: राजभवन के आदेश के अनुसार नियुक्ति पुलिस सत्यापन और अभिलेखों के सत्यापन के अधीन है। यदि सत्यापन में प्रो. बेदिया सेवा के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, तो नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा सकती है।



 
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