मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को विजन-2047 के तहत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर काम करने और जिलों में टीम बनाकर विकास कार्यों को क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर, सीईओ, एसपी और डीएफओ को अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करना चाहिए ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके। सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई की शिकायतों के निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आनी चाहिए। बताया जा रहा है कि सीएम ने कलेक्टर्स से जनता के हित में बिना डर के निर्णय लेने की भी बात कहीं। साथ ही अधिकारियों को नसीहत दी कि काम करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता, मीडिया, जनप्रतिनिधि और शासन-प्रशासन से निरंतर आत्मीय संबंध बनाएं रखे। डबल इंजन की सरकार तेजी से तब ही काम करेगी, जब सभी मिलकर काम करेंगी।
उन्होंने गीता भवन योजना को तेज गति देने, साडा परियोजनाओं की समीक्षा करने और उद्योगों के लिए एमओयू क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। पुरानी बंद मिलों की भूमि का शीघ्र निपटारा करने और धार्मिक पर्यटन के विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ लघु व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया। भू-अर्जन प्रक्रिया को सरल बनाने और राजस्व प्रकरणों का निराकरण निरंतर जारी रखने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।
कृषि क्षेत्र में जैविक और प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी फसलें और धार्मिक स्थलों के पास गुलाब की खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने और प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों के लिए बाजार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण, निजी मेडिकल कॉलेजों के पीपीपी मॉडल में निर्माण, कुपोषण अभियान की गति और महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय पर भी जोर दिया गया। नगर क्षेत्रों में शहरी यातायात सुधार, बड़े शहरों में फ्लाईओवर निर्माण और अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि प्रत्येक जिले में नवाचार और सुधार लगातार जारी रहने चाहिए ताकि मध्यप्रदेश 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर प्रदेश बन सके।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश
- सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।
- कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।
- कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।
- सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।
- जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।
- किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।
- जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।
- जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।
- गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।
- साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।
- उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।
- पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।
- लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।
- भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।
- राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।
- कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।
- प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।
- गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।
- ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।
- कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।
- जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।
- नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।
- बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।
- अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।