मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग को और अधिक जनोन्मुख बनाया जाए, ताकि शहरी और ग्रामीण नागरिक समय पर सुगम सेवाएं प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं का शीघ्र क्रियान्वयन और राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण में तेजी लाना आवश्यक है। सत्र का संचालन अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल ने किया। इसमें राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। जानकारी दी गई कि तीन राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना लागू की गई, जिसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए। भू-अर्जन के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) विकसित किया गया है।
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प्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफेरेंस के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया, जिसमें अब तक 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। सत्र में निर्मल नर्मदा हेतु 16 जिलों के समन्वय और अनुश्रवण के लिए समिति गठन पर चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं, अस्पतालों और जनभागीदारी समितियों के कार्यों, रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियों, सीएसआर पहल और सीएम हेल्पलाइन की प्रभावशीलता पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में नवाचार, समन्वय और जनसहयोग लगातार जारी रहे, जिससे मध्यप्रदेश में राजस्व सेवाओं और जनकल्याण के क्षेत्र में व्यापक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।