परिवहन के दौरान भारी जुर्माने की कार्रवाई के विरोध में भोपाल के डंपर संचालकों का आंदोलन अब सड़क से थाने तक पहुंच गया है। मंगलवार को लोकल ट्रांसपोर्ट जागरूकता सहायता समिति और ट्रक एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने कमला नगर थाने में प्रदर्शन किया।संगठन का दावा है कि भोपाल और आसपास के इलाकों में करीब 2 हजार डंपरों के पहिये थम गए हैं। चूनाभट्टी से सर्वधर्म ब्रिज तक सड़क किनारे डंपर खड़े किए गए हैं। संचालकों का आरोप है कि खनिज और अन्य विभागों की कार्रवाई के दौरान वाहनों पर चार लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके अलावा 20 से 40 हजार रुपये तक अतिरिक्त राशि भी वसूली जा रही है। उनका कहना है कि पिछले करीब तीन साल से इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। अब संचालकों ने सामूहिक रूप से वाहन खड़े कर विरोध शुरू कर दिया है।
चूनाभट्टी से कोलार तक डंपर खड़े, यातायात पर भी असर
लोकल ट्रांसपोर्ट जागरूकता सहायता समिति के बैनर तले चूनाभट्टी चौराहे पर धरना दिया गया। संगठन के मुताबिक, चूनाभट्टी से सर्वधर्म ब्रिज तक कोलार रोड के दोनों ओर बड़ी संख्या में डंपर खड़े किए गए हैं। इसके अलावा ईंटखेड़ी, रायसेन रोड और 11 मील समेत अलग-अलग क्षेत्रों में भी डंपर खड़े होने का दावा किया गया है। समिति का कहना है कि करीब 700 डंपर संचालक आंदोलन के समर्थन में हैं। संचालकों के मुताबिक, यदि कार्रवाई और भारी जुर्माने का सिलसिला जारी रहा तो उनके लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।
रातीबड़ में कथित अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया
प्रदर्शन के दौरान रातीबड़ क्षेत्र में कथित अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया गया। समिति का आरोप है कि अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर परिवहन करने वाले ट्रक और डंपर संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। समिति के मनोज राठौड़ ने कहा कि अवैध खनन करने वालों की भूमिका की जांच होने के बजाय ट्रक मालिकों और चालकों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अवैध खनन, पर्यावरणीय नुकसान और खनिज परिवहन से जुड़े मामलों की अलग-अलग जांच की जाए और वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
चार लाख की शास्ति पर कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
समिति ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को दिए आवेदन में मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 के नियम 19 के तहत पर्यावरण क्षतिपूर्ति के नाम पर लगाई जा रही शास्तियों का विरोध किया है। आवेदन में चार लाख रुपये तक की शास्ति का उल्लेख करते हुए इसे वापस लेने और कथित उत्पीड़न रोकने की मांग की गई है।मनोज राठौड़, समिति के अध्यक्ष पवन सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष महेश तोमर और सचिव रोहित यादव ने बताया कि संगठन कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उचित
कार्रवाई की मांग कर रहा है।
मंत्रालय और अधिकारियों से संपर्क के बाद आंदोलन
संगठन के अध्यक्ष पवन सिंह का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय, संबंधित विभागों के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया गया, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता अपनाया गया। संचालकों ने कहा है कि वे अपनी समस्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी रखना चाहते हैं। उनकी मांग है कि परिवहन के दौरान वाहनों पर लगाए जा रहे भारी जुर्माने की कार्रवाई की समीक्षा की जाए और जिन मामलों में वाहन मालिक या चालक जिम्मेदार नहीं हैं, उनमें राहत दी जाए।
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23 सितंबर से चक्का जाम की चेतावनी
डंपर संचालकों ने आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी है। समिति के मुताबिक, यदि उनकी मांगों पर 22 सितंबर तक राहत नहीं मिलती है तो 23 सितंबर 2026 से चूनाभट्टी चौराहे पर चक्का जाम किया जाएगा। संचालकों का कहना है कि मांगों पर निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रेत-गिट्टी की सप्लाई पर पड़ सकता है असर
डंपरों के पहिये थमने से शहर में निर्माण सामग्री की ढुलाई प्रभावित होने की आशंका है। संचालकों के मुताबिक, रेत, गिट्टी और कोपरा की सप्लाई में डंपरों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचा तो निर्माण सामग्री की उपलब्धता और ढुलाई पर असर पड़ सकता है।