फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भोपाली मियां के झोले-बतोले: कोन पे पिरसन्न होंगे महाकाल कमल पे या कमलनाथ पे?

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को उज्जैन में श्री महाकाल लोक का लोकार्पण करेंगे। इसके लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। इस घटना को हमारे बतोलेबाज ने खास भोपाली अंदाज में लिखा है। 
विज्ञापन
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

को खां, उज्जेन में भगवान महाकालेश्वर की सियासी किरपा किसपे ओर कब होगी, ये तो कोई नई जान रिया पर महाकाल लोक के लोकारपण के पेले एक आला अफसर के काम जरूर डल गए। उज्जेन नगर निगम आयुक्त को एक गाय की वजह से सीएम शिवराज सिंह चोहान की नाराजगी झेलनी पड़ी ओर उस अफसर तो ताबड़तोड़ तरीके से चलता कर दिया गया। उज्जेन में 793 करोड़ रू. की लागत से बने ओर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर में अकीदे ओर सियासत का गजब मिक्चर हेगा। पूरा महाकाल लोक 20 हेक्टेयर में बना हेगा। इसमें तमाम खूबसूरत मूर्तियां ओर फव्वारे वगेरा लगे हें। पिरधानमंतरी नरेन्द्र मोदीजी 11 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करने वाले हेंगे। उधर अफसरों की नपाई के साथ साथ इस महाकाल लोक की किरेडिट लेने सियासी दावे ओर छींटाकशी भी चालू हो गई हे। 

विज्ञापन


मियां, महाकाल लोक चार साल में बनके तैयार हुआ हेगा। कोशिश ये हेगी के ये काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की टक्कर का बने। शिवराज सरकार इस जुगाड़ में लगी हे के पिरदेश में महाकाल लोक के उद्घाटन पे दिवाली से पेले ई दिवाली मन जाए। जब मोदीजी इसका उद्घाटन करेंगे तब पूरे पिरदेश के 25 हजार मंदिरों में एलईडी स्क्रीन पे इसे दिखाया जाएगा। मंदिर किसी भगवान का हो, सबमें बम बम भोले का जयकारा होगा। यूं भी उज्जेन पूरे एमपी की शान हेगी। इस शहर में तो पूरे पांच दिन जलसा होगा। शहर के करीब तीन सौ मंदिरो की रंगाई पुताई का काम जोरों से चल रिया हे। साथ ही जिले की 609 पंचायतों के प्रमुख मंदिरों को सजाया जा रिया हे। शहर में लोकल छुट्टी का भी एलान हो गया हे। 

अगर देश की बात की जाए तो हिंदुस्तान में कुल 23 हजार सरकारी मंदिर व ट्रस्ट हैं। 2 हजार से ज्यादा मंदिरों की देखरेख जाती तोर पे की जाती हे। इन सभी मंदिरो में 11 अक्टूबर की शाम 5 बजे दीप जलेंगे। पूजा अर्चना, भजन कीर्तन होगा। मंदिरों की सफाई का जिम्मा समिति या पुजारियों पर रहेगा। निकाय और पंचायतें भी सफाई करवाएगी। भोपाल के मंदिरों में दोपहर 4 बजे से मंदिरों में शंखनाद होगा। पिरभात फेरी ओर हवन यज्ञ करे जाएंगे। उधर सीएम शिवराज ने उद्घाटन से पेले ई महाकाल जाकर अभिषेक पूजा अर्चना कर डाली। महाकाल की सवारी में भी शामिल हुए। वो तमाम इंतजामात का जायजा भी ले रिए हेंगे के कहीं कोई कमी न रे जाए।  
विज्ञापन


खां, महाकाल लोक काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से चार गुना बड़ा हेगा। समूचे इलाके में तमाम नाम वेदिक कर दिए हें। हार फूल, पिरसाद के वास्ते खूबसूरत 87 दुकाने भी बनी हेंगी। 

मियां, महाकाल लोक उद्घाटन के पेले ई सियासत का दोर भी चालू हो गया हे। सीएम ने उज्जेन नगर निगम के आयुक्त को जिस ताबड़तोड़ तरीके से चलता करा, उसपे सियासी कमेंटबाजी हो रई हे। मोका देख के बीजेपी के नेता केलाश विजयवर्गीय ने चोका लगाया कि इंदोर की सफाई का किरेडिट तो यहां की पब्लिक को जाता हेगा। अगर अफसर ई सफाई करवा रिए होते तो उज्जेन में भी वो दिखता। उनका इशारा उस अफसर की ओर था, जिसे सड़क पे गायें घूमने ओर कचरा न उठवा पाने की वजह से हटाया गया था। 
अब असल बात ये भी हे के एमपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हेंगे। महाकाल अगर खुश हुए तो पूरे मालवा रीजन पे होंगे। 

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मालवा ने तगड़ा झटका दिया था ओर कुर्सी चंद हाथ की दूरी पे रूक गई थी। इस बार बीजेपी कोई रिस्क नई ले रई हेगी। जो लोग काशी नई जा पाएंगे, वो महाकाल लोक में भोले भंडारी के दर्शन करके निहाल होंगे। भगवान यूं पिरसन्न रिए तो अगले चुनाव में पार्टी की नैया तर जाएगी। मजे की बात ये हेगी किे मियां, तकरीबन ये ई बात कांगरेस भी सोच रई हेगी। पार्टी के पिरवक्ता अजय सिंह यादव ने दावा करा के महाकाल लोक की तामीर में माजी मुख्यमंत्री कमलनाथ का भी बड़ा योगदान हे। लिहाजा उद्घाटन के मोके पे उनका भी जिक्र सरकार को करना चाहिए। क्योंकि कोरिडोर में भोत से काम तो कमलनाथ के सवा साल की सरकार में हुए थे। इसके जवाब में बीजेपी के डॉ. हितेश वाजपेयी ने पलटवार करा के कमलनाथ सरकार ने तो महाकाल लोक में एक ईंट तक नई लगने दी। वेसे कमलनाथ को शिव भक्त से ज्यादा हनुमान भक्त माना जाता हे। अब देखना ये हे के महाकाल कोन पे पिरसन्न होते हें कमल का झंडा थामे शिवराज पे या उसे नाथने वाले कमलनाथ पे? 
 
- बतोलेबाज

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।  

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें