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Bhopal: बिल्डर्स के निशाने पर वक्फ प्रॉपर्टी और NRI का पैसा, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में सरकारी नियम दरकिनार

Wed, 22 May 2024 06:36 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राजधानी भोपाल के पुराने इलाके में इन दिनों पुराने और जर्जर मकानों को नई मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में तब्दील करने की होड़ लगी हुई है। बिल्डर का पैसा और पुरानी पुश्तैनी जमीन के कॉम्बिनेशन से तैयार ही रही इन बिल्डिंग को महंगे दाम पर बेचा जा रहा है।
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बिल्डर्स के निशाने पर वक्फ प्रॉपर्टी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल शहर में कुकुरमुत्ते की तरह फैल रही मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स में सरकारी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। ज्वाइंट वेंटर के तौर पर धड़ल्ले से खड़ी होती जा रही बिल्डिंग्स में जमीन के वैध डॉक्यूमेंट्स का ख्याल भी नहीं रखा जा रहा है। इधर, बिल्डर्स ने अपने प्रॉफिट को पुख्ता और आसान बनाने के लिए विदेशों में बसे शहरवासियों को भी निशाना बनाया है। बेईमानी की नीयत के साथ शूरू किए जा रहे प्रोजेक्ट के अंजाम के रूप में वह लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं, जिन्होंने अपने ख्वाबों का आशियाना खरीदने में अपने खून पसीने की पूंजी झोंक दी है।

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शहर की वक्फ प्रॉपर्टी को ठिकाने लगाने में मुस्लिम समुदाय की ही सबसे बड़ी भूमिका है। शहर के कब्रिस्तानों की करीब 187 की संख्या को महज 13 पर लाकर छोड़ देने में ऐसे ही लालचखोर लोगों का हाथ है। इसी कड़ी में शहर के बीच स्थित एक और कब्रिस्तान बलि चढ़ गया है। वक्फ के कब्जादार और बिल्डर फैसल कुरैशी पुत्र जमील कुरैशी और पार्टनर अब्दुल ज़हीर बेग, की गठजोड़ से पुल बोगदा क्षेत्र में स्थित बाग फरहत अफजा पर मेट्रो टावर नामक बिल्डिंग तान दी गई है। इस जमीन को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में मामला 2014 से विचाराधीन है। इसके बावजूद बिल्डर जमील कुरैशी ने वक्फ कब्जादार हसीब के साथ एक प्लॉट का बड़ी राशि का सौदा कर डाला। इस मामले में आने वाले फैसले से प्रभावित वे लोग होने वाले हैं, जिन्होंने बड़ी रकम अदा कर इस टॉवर में फ्लैट और दुकानें खरीद लिए हैं।

और ठगे जा रहे एनआरआई
सूत्रों का कहना है कि बिल्डर जमील कुरैशी ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी इमरान अहमद से एक बड़ी राशि अपने प्रोजेक्ट में लगाने के नाम पर ले ली है। करीब 10 साल पहले हुए इस साझेदारी समझौते के बाद जमील कुरैशी ने न तो इमरान को उनकी मूल रकम लौटाई और न ही किसी प्रोजेक्ट से होने वाला कोई फायदा ही उन्हें पहुंचाया और न ही किसी प्रोजेक्ट में हिस्सा दिया।
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देश से दूर रहने के कारण कुछ कर न पाने के हालात मानते हुए जमील कुरैशी और पुत्र फैसल कुरैशी लगातार इमरान को झूठे आश्वासन और फर्जी हिसाब से बहला रहे हैं। इस अवधि के दौरान, जमील कुरैशी, फैसल कुरैशी और ज़हीर बेग ने 46 दुकानों, 46 फ्लैट्स, 4 रोहाउस और प्लॉट बिक्री और खुद का बंगला का जेवी पूरा किया। मामले को लेकर पुलिस से लेकर अदालत तक में शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन इमरान फिलहाल किसी इंसाफ की तहरीर के इंतजार में ही हैं।

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