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Bhopal: बच्ची के रीढ़ की हड्डी में भर गया एक लीटर मवाद, हमीदिया में हुई जटिल सर्जरी, दिल्ली से मंगाई मशीन

Thu, 10 Jul 2025 08:09 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में एक 15 वर्ष की बच्ची इशरा खान की रीढ़ की हड्डी में टीबी के चलते अत्याधिक मवाद भर गया था। जिससे रीढ़ की हड्डी पूरी तरह गल चुकी थी और हड्डी में विकृति जिसे कूबड़ भी कहा जाता है, निकल आया था। निजी अस्पताल के इलाज में सुधार नहीं होने पर हमीदिया में जटिल सर्जरी की गई। 
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इलाज के बाद चिकित्सकों के साथ बच्ची - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बड़ी बीमारी होने पर लोग निजी अस्पतालों की ओर रुख करते हैं। वहीं दूसरी तरफ राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के चिकित्सकों ने एक 15 साल की बच्ची की जटिल सर्जरी कर उसको नया जीवन दिया है दरअसल भोपाल में एक 15 वर्ष की बच्ची इशरा खान की रीढ़ की हड्डी में टीबी के चलते हड्डी में अत्याधिक मवाद भर गया था। रोग के कारण गली हुई हड्डी, सड़ चुके मांस और मवाद से भरा कूबड़ बाहर निकल आया था, जिससे बच्ची आगे की ओर झुक गई थी। इन सबके बावजूद, आयुष्मान भारत योजना के तहत बच्ची का निजी अस्पताल में 15 दिन तक इलाज चला, जहां केवल जांचें और दर्द की गोलियां दी गईं। जब हालत बिगड़ने लगी, तो उसे हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां डॉक्टरों की टीम ने रेयर और जटिल सर्जरी कर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि उसे दोबारा अपने पैरों पर सीधा खड़ा कर दिया।
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खराब हो सकते थे दोनो पैर
हमीदिया के चिकित्सकों ने बताया कि मरीज की संपूर्ण जांच के बाद रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान लगभग 1 लीटर से अधिक मवाद निकाला गया एवं कूबड़ हुई टेड़ी हड्डी को पेडिकल स्क्रू तकनीक एवं रॉड के सहारे सीधा किया गया। अत्यधिक चुनौती यह थी कि ऑपरेशन के दौरान एवं हड्डी सीधी करने पर रीढ़ की हड्डी की नस यदि दब जाती तो इशरा के दोनों पैर की ताकत जाने का खतरा होता है।

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दिल्ली से बुलाई मशीन
हमीदिया चिकित्सालय के अधीक्षक द्वारा दिल्ली से विशेष रूप से मल्टी मोडल सिस्टम फॉर इन्ट्रा ऑपरेटिव मॉनीटर की मशीन बुलाई गई, जो कि ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी एवं पैरों की नसों को मॉनीटर करती रहती है, जिससे कि किसी भी नस की ताकत ऑपरेशन के दौरान मॉनीटर की जा सकती है। लगभग 2 घण्टे में ऑपरेशन पूर्ण किया गया और इशरा पूर्णतः स्वस्थ्य होकर चलने भी लगी है। वह गुरुवार को हमीदिया चिकित्सालय से डिस्चार्ज की गई है। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अस्थिरोग विभाग की टीम डॉ. वैभव जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. आशीष गोहिया एवं डॉ. सुनीत टण्डन द्वारा सम्पूर्ण किया गया, जिसमें विशेष सहयोग निश्चेतना विभाग के डॉ. ट्यूिंकल केवल, डॉ. उर्मिला केसरी, डॉ. आरपी कौशल द्वारा प्रदान किया गया।
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पिता बोले-हम तो बिल्कुल निराश हो चुके थे
इशरा का सम्पूर्ण ईलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किया गया है। मरीज के परिजनों ने भी अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। मरीज के पिता ने कहा, हम तो बिल्कुल निराश  हो चुके थे। इस अस्पताल ने हमारी बेटी को एक नई जिंदगी दी है।
 
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