गर्मी का सीजन शुरू होते ही जल का संकट शुरू हो जाता है। प्रदेश की कई क्षेत्रों से पानी की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे ही एक मामले पर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की नल जल योजना पर सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने अपने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि मप्र के गांवों में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गोहद-मेहगांव क्षेत्र के 75 गांव नल-जल योजना के बावजूद आज भी पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। कई गांवों में खारा पानी ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों को गांव छोड़ने की नौबत आ गई है।सरकारी रिकॉर्ड में योजनाएं चालू दिख रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते धूल चाट रही योजनाएं
नेता प्रतिपक्ष ने लिखा कि पीएचई विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते करोड़ों की योजनाएं धूल चाट रही हैं।ये केवल जल संकट नहीं, ये सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार की गवाही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा किअब सवाल यह है कि सरकार बताए, नल जल योजना का पैसा खय गया? जनता को उसका हक साफ पानी कब मिलगा?
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कारम बांध या घोटालों का बांध?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि आदिवासी बाहुल्य धार जिले में भाजपा शासन का काला सच! कारम मुख्य बांध जिसको बनाने में करोड़ों की लागत लगी 2022 में दीवार फूटी और आज 2025 में भी बांध का निर्माण अधूरा हैं। घटिया निर्माण के चलते बांध से पानी का लीकेज हुआ, लाखों जिंदगियां खतरे में आ गई थी लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने के मेरे सवाल पर सरकार आज भी मौन साधे बैठी है। प्रशासनिक नाकामी और ठेकेदारों की मिलीभगत ने मध्यप्रदेश को शर्मसार कर दिया है। 300 करोड़ से ज़्यादा की स्वीकृति से 52 गांवों को सिंचाई का सपना दिखाया, गया लेकिन हकीकत, टूटी दीवारें, बहता पैसा, सूखी ज़मीन और डूबते गांव। विस्थापितों को मुआवजा कब मिलेगा सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं? ये है भाजपा सरकार का सच, जहां मंत्री मौन हैं, अधिकारी गायब हैं, और जनता परेशान हैं। .