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Bhopal: आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह पर उठे सवाल, NSUI बोली-4 साल की डिग्री 8 साल में मिल रही

Thu, 01 May 2025 06:55 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह पर सवाल खड़े हो रहे हैं।एनएसयूआई ने कहा है कि विश्वविद्यालय में 4 साल में पूरी होने वाली डिग्रियां 8 साल में मिल रही है। दिखावे के लिए दीक्षांत समारोह का किया जा रहा है आयोजन।
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आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा 3 मई को आयोजित किए जा रहे दीक्षांत समारोह पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आपत्ति जताते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि वही विश्वविद्यालय, जो बीते आठ वर्षों में छात्रों को समय पर डिग्रियां नहीं दे सका, विश्वविद्यालय 4 साल में पूरी होने वाली डिग्रियां 8 साल में मिल रही है। दिखावे के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन कर रहा है ।परमार ने कहा कि यह समारोह विश्वविद्यालय प्रशासन के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास है, न कि छात्रों के भविष्य का उत्सव।
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विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर एनएसयूआई के आरोप
1. कुलगुरु अशोक खंडेलवाल न केवल नर्सिंग घोटाले, बल्कि करोड़ों रुपये की FD धोखाधड़ी में भी दोषी हैं।
2. कुलसचिव पुष्पराज बघेल पर लोकायुक्त और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) में प्रकरण पंजीबद्ध हैं, फिर भी वे आज तक पद पर बने हुए हैं।
3. परीक्षा नियंत्रक सचिन कुचिया की भूमिका और भी अधिक आपत्तिजनक है, जिन पर छात्रों के परीक्षा परिणामों व प्रमाण पत्रों को लेकर गंभीर आरोप हैं ग्वालियर हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा था कि तुम चपरासी बनने लायक नहीं हो । 
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CBI जांच के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
परमार ने बताया कि नर्सिंग महाघोटाले में सबसे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2023 में नर्सिंग घोटाले के संबंध में मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध 364 नर्सिंग कॉलेजों की CBI जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन विश्वविद्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई । 


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NSUI की प्रमुख मांगे
1. विश्वविद्यालय प्रशासन में संलिप्त दोषियों को तत्काल पद से हटाया जाए।
2. नर्सिंग और FD घोटालों की न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए।
3. छात्रों को समय पर डिग्रियाँ और प्रमाणपत्र दिए जाएं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

 
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