मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के चर्चित प्यारे मियां केस में यौन शोषण की शिकार नाबालिग लड़की की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसने नींद की गोलियां खा ली थीं, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बच्ची की मौत के बाद इस मामले में सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, बालिका गृह प्रबंधन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जिला प्रशासन अब तक यह नहीं पता कर पाया है कि बच्ची ने नींद की गोलियां खाईं या उसे जहर दिया गया? जब बालिका गृह में खाने की हर चीज की जांच की जाती है तो बच्ची तक जहर या नींद की गोलियां कैसे पहुंचीं?
यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि जुलाई 2020 के दौरान भोपाल में चार नाबालिग सहित पांच लड़कियों ने 68 वर्षीय पत्रकार प्यारे मियां उर्फ अब्बा पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। इसके बाद प्यारे मियां को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल, वह जेल में बंद है। इस बीच 18 जनवरी को इन पीड़ित लड़कियों में से एक नाबालिग की तबीयत बिगड़ गई। दावा किया गया कि उसने नींद की गोलियां खा लीं। इसके बाद उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईडी चौरसिया ने बताया कि नाबालिग जब अस्पताल में भर्ती हुई थी, तब उसकी धड़कन 92 प्रति मिनट और ब्लड प्रेशर 100/60 था।
मामले की न्यायिक जांच शुरू
बता दें कि इस मामले में एडीएम माया अवस्थी ने न्यायिक जांच शुरू कर दी है, जो करीब दो सप्ताह में पूरी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगले 15 दिन तक कोई भी व्यक्ति घटना से जुड़े तथ्य और साक्ष्य उन्हें दे सकता है, जिन्हें जांच में शामिल किया जाएगा।
बच्ची की मौत पर उठ रहे सवाल
इस घटना के बाद बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, सुरक्षा के नाम पर परिजनों द्वारा भेजे जाने वाले खाने के पैकेट की रोजाना जांच होती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि प्यारे मियां मामले में यौन शोषण की शिकार बच्ची तक बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां या संदिग्ध जहर कैसे पहुंच गया, जो उसकी मौत का कारण बन गया।
परिजनों ने कही यह बात
नाबालिग के चाचा ने बताया कि बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पहले शव ले जाने के लिए दबाव बना रहा था। बाद में पोस्टमॉर्टम होने की जानकारी दी गई। वहीं, नाबालिग की मां ने कहा कि मैं 6 महीने से अपनी बेटी मांग रही थी, लेकिन बालिका गृह वालों ने नहीं दी। मुझे सिर्फ सात बार उससे मिलने दिया गया। मेरी बेटी अपराधी नहीं थी, फिर उसे कैदियों की तरह क्यों रखा?