सभी एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी द्वारा अनिश्चित कालीन हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को सभी कर्मचारियों ने अपने खून से सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा। कर्मचारियों ने बाताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत् लगभग 32000 कर्मचारी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से देते आ रहे हैं। लेकिन सरकार वादाखिलाफी कर रही है।
कर्मचारियों की सुविधा में कटौती
संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल के द्वारा संविदा नीति 2023 का पूर्ण रूप से लाभ न प्रदान करते हुए कर्मचारियों की सुविधा में कटौती कर सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश की अवहेलना करते हुए कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी की जा रही है। इसके अतिरिक्त वेतन विसंगति और नियमितीकरण की मांग सहित अन्य मांगे भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा की जा रही है।
अगल-अलग माध्यम से प्रदर्शन
उन्होने बताया कि मंगलवार से हड़ताल प्रारंभ की गई है। बुधवार को हड़ताल का दूसरा दिन था। 23 अप्रैल को सभी स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल के दूसरे दिन पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री के नाम से प्रेषित किया गया है। हड़ताल के तीसरे दिन 24 अप्रैल को सुंदरकांड का आयोजन, 25 अप्रैल को जिले के जनप्रतिनिधियों के निवास पर मांग पत्र ज्ञापन सौंपा जाएगा, 26 अप्रैल को धरना स्थल पर थाली कटोरी बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, 27 अप्रैल को क्रमिक भूख हड़ताल में सुबह 10.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक दो साथी बैठेंगे, 28 अप्रैल से प्रत्येक जिले में भोपाल भरो आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर शत प्रतिशत भोपाल लाने की तैयारी की जाएगी। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल से नीमच जिले में टीकाकरण की सुविधा गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच एनआरसी व एमसीडी में आने वाले मरीजों की बीपी शुगर की जांच टीवी व मलेरिया की जांच जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ रहा है।
यह है प्रमुख मांगे
1. विभाग में रिक्त पदों पर संविलियन किया जाकर, नियमित किया जाए।
2. पूर्व से दी जा रही सुविधाओं में ई. एल. एवं मेडिकल को पृथक कर दिया है।
3.अनुबंध प्रथा को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया गया है।
4.अप्रेजल जैसी कुरीति को यथावत रखा गया है।
5.सेवा निवृत्ति की आयु में 65 वर्ष से घटाकर 62 वर्ष किया गया है।
6. एन.पी.एस., ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा एवं डी.ए. की सुविधा से वंचित रखा गया है।
7. शासन द्वारा समकक्षता (वेतन विसंगति) का निर्धारण गलत तरीके से किया गया
है, जिसमें पुनः विचार कर संशोधन किया जावें।
8. निष्कासित सपोर्ट स्टॉफ एवं मलेरिया एमपीडब्ल्यू की एनएचएम में वापसी।