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Bhopal News: PETA के समर्थकों ने कुत्ते का पुतला प्रतीकात्मक भून कर, शाकाहारी बनने को किया प्रेरित

Fri, 08 Dec 2023 07:00 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Bhopal News: देश दुनिया में फैले मांसाहार को रोकने के लिए कई संस्थाएं जागरुकता अभियान चला रही हैं। ये सभी लोगों को शाकाहारी बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके लिए 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय पशु अधिकार दिवस भी मनाया जाता है।
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पेटा इंडिया समर्थक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंतर्राष्ट्रीय पशु अधिकार दिवस से एक दिन पहले पेटा इंडिया के समर्थकों ने भोपाल में शुक्रवार को बोट क्लब पर अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने कुत्ते का पुतला प्रतीकात्मक भून कर लोगों को शाकाहारी बनने के लिए प्रेरित किया। 

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पेटा इंडिया के कैंपेन कोऑर्डिनेटर उत्कर्ष गर्ग ने कहा कि मुर्गियां, बकरियां, गाय और कुत्ता अलग नहीं हैं। पेटा इंडिया सभी जानवरों को अपनी थाली से दूर रखने के लिए उन सभी को प्रोत्साहित कर रहा है, जिनको कुत्तों का मांस खाने में घिन आती है, लेकिन अन्य जानवरों का मांस खाने में बुराई नहीं नजर आती। 

एक अन्य कॉर्डिनेटर अयान अली ने कहा कि जैसा कि पेटा इंडिया, इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि जानवर हमारा भोजन बनने के लिए नहीं है। डॉक्यूमेंट्री क्लास वॉल्स में सामने आया है कि भैंस, बकरी और भोजन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जानवरों को अक्सर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूस कर भर दिया जाता है कि वे परिवहन के दौरान गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या बूचड़खानों तक पहुंचते-पहुंचते रास्ते में ही मर जाते हैं। उन्हें मारा पीटा जाता है, दुर्व्यवहार किया जाता है और आमतौर पर उन्हें भोजन, पानी और पशु चिकित्सा देखभाल जैसी सबसे बुनियादी जरूरतों से भी वंचित रखा जाता है। बूचड़खाने में उन्हें एक दूसरे के सामने खुले में मार दिया जाता है और अक्सर सचेत अवस्था में ही उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाते हैं, उनकी खाल भी उतार दी जाती है। 
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गंभीर बीमारी का कारण
एक अन्य कोऑर्डिनेटर इशिता ने कहा कि पशु पदार्थ का सेवन निर्णायक रूप से हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और मोटापे से पीड़ित होने के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त भोजन के लिए जानवरों को पालना दुनिया भर में जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकला है कि जलवायु आपदा के सबसे बुरे प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन जीवन शैली अपनाना बहुत आवश्यक है। पेटा इंडिया प्रजाति बात का विरोध करता है। क्योंकि यह कैसी धारणा है, जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है।

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