आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने करीब 1800 नोटिस जारी होने का दावा करते हुए कहा कि कार्रवाई से हजारों परिवारों की आजीविका और छोटे कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार की जिम्मेदारी भी तय हो
पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होना चाहिए, लेकिन वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों पर पूरा बोझ डालना उचित नहीं है। यदि दुकानों, कार्यालयों, क्लिनिक और अन्य कारोबार को वर्षों तक कर, लाइसेंस या दूसरी सरकारी अनुमतियां मिलती रहीं, तो अब अचानक पूरी जिम्मेदारी नागरिकों पर डालना न्यायसंगत नहीं है।
2005 के मास्टर प्लान पर चल रहा भोपाल
उन्होंने कहा कि भोपाल की मौजूदा विकास योजना वर्ष 2005 से प्रभावी है, जबकि 2031 की विकास योजना का मसौदा फरवरी 2024 में वापस किया जा चुका है। इसके बाद भी संशोधित योजना सामने नहीं आई। पटवारी ने कहा कि तेजी से बढ़ चुके भोपाल को करीब दो दशक पुराने भू-उपयोग के आधार पर चलाना शहरी नियोजन की बड़ी कमी है।
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सीलिंग के बजाय नियमितीकरण और वैकल्पिक बाजार
पटवारी ने मुख्यमंत्री से प्रभावित कारोबारों के लिए नियमितीकरण, पुनर्वर्गीकरण या वैकल्पिक व्यावसायिक स्थान की नीति बनाने की मांग की। उन्होंने मिश्रित भू-उपयोग वाले क्षेत्रों को चिन्हित करने, छोटे व्यापारियों के लिए किफायती बाजार विकसित करने और प्रभावित इलाकों में जनसुनवाई कराने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में मास्टर प्लान को 20 साल तक लंबित रखने के बजाय हर पांच वर्ष में इसकी समीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
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भोपाल को नोटिस और सीलिंग नहीं, स्पष्ट नीति चाहिए
पटवारी ने कहा कि भोपाल को ‘सीलिंग बनाम व्यापार’ या ‘रहवासी बनाम व्यापारी’ के संघर्ष में धकेलना समाधान नहीं है। सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिसमें रहवासियों के अधिकार सुरक्षित रहें और छोटे व्यापारियों की आजीविका भी प्रभावित न हो। उन्होंने इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी समय रहते ऐसी कार्ययोजना बनाने की मांग की, ताकि भविष्य में वहां भी ऐसी स्थिति पैदा न हो।