मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था को लेकर घमासान तेज हो गया है। एनएसओ छात्र संगठन ने नर्सिंग काउंसिल भोपाल पर फर्जी मान्यता और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मामला सड़क से लेकर हाईकोर्ट तक जाएगा। प्रदेश उपाध्यक्ष राघवेन्द्र लोधी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में संगठन के अध्यक्ष गोपाल पाराशर ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा घोटाले के खुलासे के बावजूद न काउंसिल चेती और न ही सरकार। नियमों को दरकिनार कर बिना पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ के कॉलेजों को मान्यता दी जा रही है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में है।
कई साल से उलझे कोर्स, करियर ठप
एनएसओ ने बताया कि एएनएम और जीएनएम छात्रों की पढ़ाई समयसीमा से कई गुना लंबी खिंच चुकी है। 2 साल का एएनएम कोर्स 5 साल में भी पूरा नहीं हो पा रहा, जबकि 3 साल का जीएनएम कोर्स 7 साल बाद भी अधूरा है। परीक्षा, परिणाम, रजिस्ट्रेशन और स्कॉलरशिप की देरी ने छात्रों का समय, पैसा और करियर तीनों पर संकट खड़ा कर दिया है। इसका असर बीएससी, एमएससी और पोस्ट बेसिक नर्सिंग परीक्षाओं पर भी पड़ रहा है।
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कागजों में स्टाफ, हकीकत में सन्नाटा
छात्र संगठन का आरोप है कि मान्यता लेने के लिए कॉलेज हॉस्पिटल में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ के फर्जी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करते हैं। मान्यता मिलते ही स्टाफ को रिलीव कर दिया जाता है, लेकिन पोर्टल से नाम नहीं हटाए जाते। इसके बाद न तो निरीक्षण होता है और न ही निगरानी, जिससे पूरा सिस्टम फर्जीवाड़े की गिरफ्त में है। एनएसओ ने दो टूक कहा कि यह संघर्ष केवल नियमों का नहीं, बल्कि लाखों नर्सिंग छात्रों के भविष्य की लड़ाई है, और यदि सिस्टम नहीं सुधरा तो आंदोलन के साथ अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
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एनएसओ छात्र संगठन की मांगें
-फर्जी स्टाफ दिखाने वाले कॉलेजों की मान्यता तत्काल रद्द हो
-रिलीव किए गए स्टाफ का नाम तुरंत ऑनलाइन पोर्टल से हटाया जाए
-कॉलेजों में नियमानुसार नर्सिंग स्टाफ की अनिवार्य व्यवस्था हो
-प्रदेश के सभी हॉस्पिटल और कॉलेजों के नर्सिंग स्टाफ को एक ही पोर्टल पर आधार से लिंक किया जाए।