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Bhopal Ramadhan: पुराने शहर की गलियों में खुशबू का करिश्मा, फिजा में महक रही फौजिया, सबा और हिना

Wed, 03 Apr 2024 12:23 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Bhopal Ramadhan: जिस तरह जिस्म को तंदुरुस्त रखने के लिए उसे नियमित खुराक की जरूरत होती है, उसी तरह रूह (आत्मा) की भी एक निश्चित खुराक होती है, जो इसके व्यवस्थित संचालन के लिए जरूरी है। खुशबू को रूह की गिजा माना गया है। इस गिजा की जरूरत इबादत के दौरान कई गुना बढ़ जाती है। माह-ए-रमजान की इबादतों में खुशबू का कारोबार तेज है। बदलते दौर में अब परंपरागत खुशबू फ्लेवर से हटकर कुछ नए फ्लेवर पसंद किए जा रहे हैं। बदले जमाने में अब इसका दायरा बुजुर्ग और वरिष्ठ लोगों से बाहर निकल कर युवाओं तक भी फैला है।
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माह-ए-रमजान की इबादतों में खुशबू का कारोबार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इब्राहिमपुरा बाजार में खुशबू का कारोबार फैला हुआ है। इनमें एक खास गली इस खुशबू संसार को खुद में समेटे हुए है। जहां हर दुकान एक नया फ्लेवर, नई खुशबू आते जाते राहगीरों को मोहित और मुग्ध करती नजर आती है। कतारबद्ध इन खुशबू घरों में परंपरागत गुलाब, चंदन, हिना, शमामा, केवड़ा तो अपनी विरासत जमाए ही बैठे हैं। अब इनका साथ निभाने के लिए यहां रोमियो, फौजिया, सबा, जन्नतुल फिरदौस, जीदान भी साथ हो गए हैं।

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सबसे महंगा ऊद
वीनस परफ्यूमर के संचालक रफीक अहमद राजा बताते हैं कि दुनिया के सबसे महंगा इत्र ऊद माना जाता है। देहनूल ऊद की कीमत 5 हजार रुपए तोला तक है, जबकि शाही गुलाब के भाव 3 हजार रुपए और खस 1500 रुपए तोला हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में मोगरा जैसे इत्र की खास फरमाइश और पूछ परख हो रही है।

परफ्यूम की बजाए इत्र को तरजीह
इस्लामी मान्यता के मुताबिक नमाज के कपड़ों पर अल्कोहल युक्त परफ्यूम और स्प्रे छिड़कने की मनाही है। वजह ये है कि अल्कोहल इस्लाम में प्रतिबंधित है और इसके उपयोग वाले कपड़ों से नमाज नहीं हो सकती। इसके चलते माह ए रमजान में खुसूसी तौर से इत्र का इस्तेमाल किया जाता है। मंशा ये होती है कि इस माह की खास इबादतों को प्रतिबंधित वस्तुओं से कोई दाग न लगे।
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यहां फैली हैं खुशबू दुकानें
मुख्यतः इब्राहिमपुरा और चौक बाजार में इत्र दुकानों की बहुतायत है। इसके अलावा जुमेराती, लक्ष्मी टाकीज, काजी कैंप, जहांगीराबाद, बुधवारा, इतवारा में भी इत्र की बड़ी दुकानें मौजूद हैं। नए शहर के बड़े बाजार न्यू मार्केट में भी इत्र का एक बड़ा शो रूम मौजूद है। 

यहां चौथी पीढ़ी कर रही खिदमत
हाजी इनायत उल्लाह 1925 में कन्नौज से आकर भोपाल बसे थे। कन्नौज इत्र के लिए देशभर की सबसे बड़ी मंडी माना जाता है। इसके चलते हाजी इनायत ने यहां आकर खुशबू कारोबार को ही आगे बढ़ाया। जुमेराती से शुरू हुआ उनके कारोबार का सिलसिला करीब एक शताब्दी के बाद भी बदस्तूर जारी है। हाजी इनायत के छोटे बेटे हाजी युनुस अहमद ने इस कारोबार को आगे बढ़ाया। इब्राहिमपुरा में डाली गई उनकी वीनस परफ्यूम्स की नींव आज एक मजबूत इमारत के रूप में खड़ी हुई है। हाजी युनुस की अगली पीढ़ी के मोहम्मद अहमद और रफीक अहमद ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में सहायक की भूमिका निभाई। 100 साल के इस खुशबू संसार में अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में अमीन अहमद और जुनैद अहमद भी खिदमत में जुटे हुए हैं। इस खानदान के नौमान अहमद, अमान अहमद भी वीनस के कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

रमजान में करोड़ो का बिजनेस
सूत्रों का कहना है कि रमजान माह शहर की दुकानों का कारोबार करोड़ों रुपए के आंकड़े तक पहुंच जाता है। अपनी पसंद और हैसियत के लिहाज से हर व्यक्ति इत्र की खरीदी करता है। इस खरीदी के पीछे वह धार्मिक मान्यता भी शामिल है, जिसमें कहा गया है कि नमाज ए ईद के लिए नए, साफ और अच्छे कपड़े पहनने के साथ खुशबू लगाकर ईदगाह तक जाने की बात कही गई है। 
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भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट

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